हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि पासपोर्ट अथॉरिटी यात्रा दस्तावेज में आवेदक को पिता के नाम का उल्लेख करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि पासपोर्ट में पिता का नाम दर्ज करना कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने मई माह में इसी मुद्दे पर दिए फैसले का हवाला देते हुए जिला पासपोर्ट कार्यालय को निर्देश दिया कि वे याची को बिना पिता का नाम दर्ज करवाएं पासपोर्ट जारी करे।
अदालत ने कहा कि कहा कि जिला पासपोर्ट कार्यालय द्वारा याची युवक के पासपोर्ट के नवीकरण के लिए जैविक पिता के नाम का उल्लेख नहीं करने पर पासपोर्ट जारी न करने का निर्णय गलत है। विभाग ने याची का पासपोर्ट हाल ही में रद्द कर दिया था जो जून 2017 तक वैध था।