आत्महत्या से पहले सुंदरपाल ने एक सुसाइड नोट तैयार किया। इसमें मरने के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है, लेकिन इतना लिखा है कि अगर लोन पास नहीं हुआ तो आज मेरी आखिरी रात होगी। लोन कराने वाले एजेंट के झूठ बोलने से भी वह आहत था। बच्चों की हत्या क्यों की इसके बारे में कुछ नहीं लिखा।
सुंदरपाल मनाली में कांट्रेक्ट पर होटल चलाता था। दो महीने पहले बर्फ अधिक पड़ने के कारण घर आ गए था। व्यापार सही न चलने के कारण अवसाद से ग्रस्त था। पिछले दो महीने से वह डायरी के पन्नों पर कुछ न कुछ लिखता रहता था। आखिरी पेज पर छह मार्च से लिखना शुरू किया है। छह मार्च को लिखा है लोन कराने वाले एजेंट को फोन किया तो उसने बताया कि 6.90 लाख रुपये का लोन पास हो गया है, आपके खाते में सात मार्च को रुपया पहुंच जाएगा।
सात मार्च को फोन करने पर बोला आठ मार्च को आ जाएगा और फोन काट दिया। आठ मार्च को फोन किया तो बोला सोमवार तक आ जाएगा। मैंने फोन कर कहा कि सोमवार के बाद में इंतजार नहीं कर सकूंगा। सुसाइड नोट में 11 मार्च को लिखा है कि एजेंट को फिर से कॉल किया। एजेंट ने जबाव दिया कि सुंदरपाल 12 से एक बजे के बीच में आपका चेप्टर ही बंद कर दूंगा। तभी से उसका फोन बंद जा रहा है। 12 मार्च तड़के कमरे में कूंदे पर सुंदरपाल का शव लटका मिला। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में ले लिया है। विभिन्न बिंदुओं पर पुलिस जांच में जुटी है।
बड़ा बेटा दिमागी रूप से था कमजोर
सुंदरपाल का बड़ा बेटा तुषार दिमागी रूप से कमजोर था और वह बोल भी नहीं पाता था। गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए जाता था। जबकि बेटी माही एक निजी स्कूल में कक्षा पांच की मेधावी छात्रा थी।