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कंधे पर बेटी की लाश ढोने को मजबूर हुआ पिता, गिड़गिड़ाने के बावजूद अस्पताल ने नहीं दी एंबुलेंस

Wed, 19 Jul 2017 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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- फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद में इंसानियत को शर्मसार करने वाली ऐसी घटना सामने आई जो किसी का भी दिल दहला दे लेकिन, अस्पताल प्रशासन का दिल नहीं पसीजा और उसने पिता को एंबुलेंस देने से इनकार कर दिया।
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- फोटो : अमर उजाला
फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में दो घंटे तक इलाज नहीं मिलने की वजह से शुक्रवार दोपहर नौ साल की बच्ची ने दम तोड़ दिया। लापरवाह अस्पताल प्रबंधन ने बेटी का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नही उपलब्ध कराई। मजबूर पिता बेटी का शव कंधे पर ढो कर रोता हुआ अस्पताल से रवाना हुआ। हालांकि यह देख कुछ लोगों ने निजी एंबुलेंस का इंतजाम करवाया। सीएमओ डॉ. गुलशन अरोड़ा एंबुलेंस वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं लेकिन बच्ची की मौत की जांच कराने के प्रश्न पर चुप्पी साध ली। गाजीपुर की उड़िया कॉलोनी निवासी सोनू दिहाड़ी मजदूर है।

bk hospital
शुक्रवार सुबह करीब साढ़े दस बजे वह बुखार से तप रही नौ साल की बेटी लक्ष्मी को नाजुक हालत में बीके सिविल अस्पताल पहुंचे। उनका आरोप है कि अस्पताल की इमरजेंसी मेें बच्ची को लिटा दिया गया और दो ढाई घंटे तक उसे देखने कोई डॉक्टर नहीं आया। वह नर्स के पास जाता तो कहतीं कि डॉक्टर देखने के बाद दवा लिखेगा तभी वह कुछ करेंगी। डॉक्टर के पास जाता तो थोड़ी देर में आकर देखता हूं कह कर डांट दिया जाता।

करीब ढाई घंटे तक प्राथमिक उपचार तक नहीं मिलने से बच्ची के मुंह से झाग निकलने लगा। नर्सो को बताया तो उन्होंने डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने बच्ची को ठीक से देखा तक नहीं और रेफर करने को कह दिया। आरोप है कि रेफर कार्ड बनाने में भी इतनी देर की गई कि बच्ची की सांसें थम गईं। बेटी को गंवाने के बाद सोनू ने शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगी लेकिन उसे कोई सही जवाब नहीं मिला। सोनू ने बताया कि चालक ने कहा कि एंबुलेंस को घर तक धक्का मार कर ले जाना पड़ेगा, जाओ धक्का मारते हुए एंबुलेंस ले जाओ।
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मजबूर पिता बेटी का शव कंधे पर रख कर पत्नी और रिश्तेदारों के साथ रोता हुआ घर को रवाना हुआ। इस पर वहां मौजूद कुछ लोगों ने निजी एंबुलेंस उपलब्ध कराई, जिसमें बेटी का शव रखकर परिवार घर को रवाना हुआ। 
सोनू ने बताया कि लक्ष्मी को दो दिन पहले बुखार आया था। उसने एक निजी अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टरों ने बच्ची को भर्ती कर लिया। शुक्रवार को उसके पास पैसे नहीं बचे तो निजी अस्पताल वालों ने बच्ची  को पूरा इलाज दिए बगैर ही नाजुक हालत में डिस्चार्ज कर दिया। मजबूर होकर वह बेटी को बीके सिविल अस्पताल लाए थे। रोते हुए सोनू ने कहा कि यहां तो निजी अस्पताल से भी बुरी हालत है। गरीब परिवार को शव ले जाने के लिए एंबुंलेंस नहीं मिलने का मामला मेरी जानकारी में हैं, इसकी जांच कराई जाएगी, दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-गुलशन अरोड़ा, सीएमओ, फरीदाबाद 
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