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जमीन देने को तैयार, लेकिन पहले पूरा हक मिले

Sun, 25 Jun 2017 11:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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Jewar
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केंद्र व प्रदेश सरकार से हरी झंडी मिलने से जेवर में एयरपोर्ट बनना तय हो गया है, लेकिन जिन गांवों के किसानों की  जमीन को अधिग्रहीत कर एयरपोर्ट बनना है। उन्होंने जमीन देने के लिए दो शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि एक तो उन्हें जमीन का पूरा हक मिले और दूसरा एयरपोर्ट के लिए उनका विस्थापन जिले से बाहर न हो। 
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एयरपोर्ट के लिए नौ गांवों-मुकीमपुर सिवारा, किशोरपुर, बनवारीपुर, रोही, रामनेर, नंगला गनेशी, नगला फूलखां, नगला शरीफ खां और नंगला छीतर की जमीन का अधिग्रहण किए जाने का निर्णय लिया गया है। इन सभी गांवों के किसान  एयरपोर्ट के लिए जमीन देने व गांव छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनका कहना है कि पहले सरकार अधिग्रहण और विस्थापन नीति बनाकर जमीन व मकानों का रेट तय करे और उस पर सहमति बनने के बाद पूरा हक किसानों को मिल जाए। जेवर में एयरपोर्ट बनाने को हरी झंडी मिलने की बात पर अब भी किसान पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे है। उनका कहना है कि जब एयरपोर्ट के लिए जमीन लेने का नोटिस और विस्थापन की बात सामने आएगी, तब उन्हें भरोसा होगा। 

प्रतिक्रिया
पिछले 15 वर्षों से जेवर में एयरपोर्ट बनाने पर चर्चा हो रही थी, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार ने अब इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इससे क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। किसान एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन देने को तैयार हैं। 
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धनेश शर्मा, निवासी रामनेर

सरकार ने एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की है, लेकिन इसके लिए जमीन लेने या गांव को हटाने जैसी कोई जानकारी यहां के लोगों को नही दी। एयरपोर्ट के लिए सभी किसान अपनी जमीन देने को तैयार है, बशर्ते उन्हें पूरा हक मिल सके। 
त्रिलोक चंद शर्मा, बनवारीपुर  

प्रदेश सरकार ने हवाई अड्डे को मंजूरी दिलाकर सराहनीय काम किया है। यहां के किसान सरकार के साथ है, लेकिन सरकार को तीन काम-गांवों का विकास, किसानों को पूरा मुआवजा और युवाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था करनी होगी । -चरन सिंह, रामनेर

किसान एयरपोर्ट को जमीन देने के लिए 15 साल से तैयार है। जिन गांव के किसानों की जमीन एयरपोर्ट के लिए जानी है, अगर सरकार उन गांवों को एक ही जगह पर विस्थापित करेगी तो नजदीकियां बनी रहेंगी, नहीं तो सारे गांव बिछड़ जाएंगे।
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सुभाष सिंह, रोही
 
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