फसलों के समर्थन मूल्य का कानूनी अधिकार और पूर्ण कर्ज माफी की मांग को लेकर किसान लामबंद होने लगे हैं। राष्ट्रीय राजधानी सहित देश के अन्य प्रदेशों के दर्जनों किसान संगठन आंदोलन के मूड में हैं। 29 नवंबर को गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद सहित अन्य प्रदेशों के हजारों किसान दिल्ली के रामलीला मैदान के लिए कूच करेंगे।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के संयोजक वीएम सिंह ने बताया कि किसान अब अपने अधिकार मांगेगा नहीं, बल्कि छीन लेगा। किसानों को फसलों के समर्थन मूल्य का कानूनी अधिकार दिया जाना चाहिए। भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले गन्ना किसानों को 14 दिन के अंदर भुगतान करने सहित फसलों का उचित मूल्य देने का वादा किया था, जिसे अब भूल गई है।
संयोजक ने कहा कि हमने सरकार से वोट क्लब पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी है। किसानों के पास आने का साधन न होने की वजह से दिल्ली में ट्रैक्टरों से पहुंचेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए ट्रैक्टरों से आने की अनुमति भी सरकार से मांगी गई है, जिससे कि रामलीला मैदान से बोट क्लब के लिए मार्च निकाला जा सके।
संयोजक ने कहा कि राजू शेट्टी और केके रागेश ने लोकसभा और राज्यसभा में किसानों को कृषि वस्तुओं के लिए गारंटी लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्यों का अधिकार विधेयक, 2018 (विधेयक) पेश किया है। कई प्रमुख दलों सहित क्षेत्रीय दलों ने भी इसका समर्थन किया है। किसानों के हक में इस विधेयक को सरकार को पारित कराना चाहिए। 29 नवंबर को रामलीला मैदान के लिए हजारों की संख्या में देश के अलग-अलग प्रदेशों के किसान कूच करेंगे, जबकि उसी शाम किसानों के कार्यक्रम में देश के संगीतकार और अभिनेता भी शिरकत करेंगे। 21-28 नवंबर तक संगठनों के सदस्य दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों पर जाकर इस बारे में जागरूकता अभियान चलाएंगे।