शनिवार को किसानों ने अनूठे अंदाज में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन स्थल पर एक किसान रावण की वेशभूषा में पहुंचा। इसे सरकार रूपी रावण का नाम दिया गया था।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस. एन. श्रीवास्तव शनिवार शाम किसान आंदोलन के चलते सिंघु बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने कहा कि यहां कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य है। हम लोग सावधान हैं। स्थिति नियंत्रण में है। सुरक्षा बल पर्याप्त है।
केंद्र सरकार कृषि बिलों को वापिस न लेने पर अड़ी हुई है। ये तीनों बिल किसानों के खिलाफ हैं इसीलिए मैंने एनडीए छोड़ दी है, परन्तु कांग्रेस के साथ किसी प्रकार का गठबंधन नहीं करूंगा : हनुमान बेनीवाल, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख
दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने शनिवार को सिंघु बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) का दौरा किया। यहां किसान कृषि बिल का विरोध कर रहे हैं।
दिनभर बंद रखने के बाद शाम को किसानों ने दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे का रास्ता खोल दिया है। सुबह 11 बजे ही प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली से यूपी जाने वाली सभी लेन को बंद कर दिया था।
भाजपा के पूर्व लोकसभा सांसद हरिंदर सिंह खालसा ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों, उनकी पत्नियों और बच्चों की पीड़ा के प्रति पार्टी नेताओं और सरकार द्वारा दिखाई गई संवेदनहीनता के विरोध में पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने अपने मनोरंजन को लेकर इंतजाम किया है। आज बड़ी स्क्रीन पर सभी किसान मिलकर चार शहजादे फिल्म देखेंगे।
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके देखते हुए बॉर्डर पर एक किसान पंजीकरण बूथ बनाया गया है। इसमें आंदोलन में शामिल सभी किसानों की जानकारी रखी जा रही है।
संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से आज शाम 5:30 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। किसान नेताओं ने बताया कि कजारिया टाइल्स वाले शोरूम में कॉन्फ्रेंस होगी।
कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में राजस्थान शिक्षक संघ भी शामिल हो चुका है। संगठन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि हमारे संगठन ने सरकार के खिलाफ राजस्थान में जगह-जगह प्रदर्शन किए हैं। इन कानूनों का प्रभाव पूरे मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।
केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर एक माह से चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए शनिवार को 15 हजार किसानों का काफिला पंजाब के संगरूर के खनौरी बॉर्डर से रवाना हुआ। 27 दिसंबर को डबवाली बॉर्डर से 15 हजार किसान दिल्ली में प्रवेश करेंगे।
केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर एक माह से चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए शनिवार को 15 हजार किसानों का काफिला पंजाब के संगरूर के खनौरी बॉर्डर से रवाना हुआ। 27 दिसंबर को डबवाली बॉर्डर से 15 हजार किसान दिल्ली में प्रवेश करेंगे।
गाजीपुर बॉर्डर पर आज सुबह पंजाब से 2000 किसान पहुंचे हैं। यहां अब कुल किसानों की संख्या करीब 15 हजार हो गई है।
दिल्ली यातायात पुलिस ने जानकारी दी है कि दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाले एनएच-9 और एनएच-24 को किसानों ने ब्लॉक कर दिया है। गाजियाबाद जाने वाले यात्रियों को डीएनडी, आईटीओ और वजीराबाद के रास्तों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाले यूपी गेट पर बने लिंक रोड को भारतीय किसान यूनियन के लोगों ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया है। किसान लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। किसानों के रास्ता बंद करने से ट्रैफिक का संचालन यूपी गेट पर पूरी तरह रुक गया है।
यूपी गेट पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सभी तरफ से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी है। अब किसान केवल एम्बुलेंस को ही आने-जाने की इजाजत दे रहे हैं।
बुराड़ी स्थित समागम मैदान में प्रदर्शन कर रहे एक किसान ने कहा कि आज किसानों का विरोध शुरू हुए एक महीना पूरा हो गया है। सरकार को तीनों कानूनों को निरस्त कर देना चाहिए। जैसे ही कानून वापस लिए जाते हैं, हम अपने घरों को लौट जाएंगे।
आज पंजाब से 15 हजार किसानों का समूह दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचेगा। सभी किसान नए कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए दिल्ली बॉर्डर आ रहे हैं।
कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के 31वें दिन किसानों ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सभी लाइनों को बंद कर दिया है। युवा किसान सड़क पर बैठकर लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। सरकार से कानूनों को वापस लेने के मांग उठ रही है।
धारूहेड़ा फ्लाईओवर के नीचे - यहां पर वाहन चालक भगत सिंह चौक, टपुकड़ा, तिजारा, किशनगढ़ से अलवर होते हुए जयपुर जा सकते हैं।
मसानी पुल - यदि वाहन चालक मसानी बैराज के पास फंसे हुए हैं तो उन्हें रेवाड़ी शहर होते हुए कुंड, नारनौल, नांगल चौधरी, पनियाला मोड से कोटपुतली होते हुए जयपुर जाने का रास्ता मिल सकता है।
रेवाड़ी-गुरुग्राम सीमा के कापड़ीवास बॉर्डर पर-दिल्ली-जयपुर हाईवे पर गुरुग्राम की ओर से आने वाले वाहनों को आकेड़ा-भिवाड़ी-तीजार-अलवर की तरफ डायवर्ट किया जा रहा है। यहां से अलवर होते हुए वाहन चालक जयपुर जा सकते हैं। इसके लिए 100 किमी. तक ज्यादा दूरी तय करनी पड़ सकती है।
किसान आंदोलन के चलते दिल्ली-जयपुर हाईवे 48 पर हरियाणा-राजस्थान सीमा के खेड़ा बॉर्डर से लेकर गुरुग्राम तक जाम की स्थिति है। जाम से बचने के लिए डायवर्जन प्वाइंट की जानकारी होना जरूरी है।
गाज़ीपुर (दिल्ली-यूपी) बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए सिंघु बॉर्डर की तरह दूसरी टेंट सिटी तैयार की गई है।
कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता तब तक हम यहीं बैठे रहेंगे। चाहें एक साल या उससे अधिक समय लग जाएं।।
कृषि कानूनों के खिलाफ बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में किसान अभी भी डटे हुए हैं।
किसान आंदोलन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है कि मिट्टी का कण-कण गूंज रहा है, सरकार को सुनना पड़ेगा।
सिंघु बॉर्डर से एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि मोदी सरकार से विनती है कि ये तीनों काले कानूनों को रद्द करें। जो लोग हमें आतंकवादी कह रहे हैं हम आतंकवादी नहीं हैं.. जब हम हिंदुओं के लिए लड़ते हैं तब हम फरिश्ते और जब हम अपने लिए लड़ रहें तो हमें आतंकवादी बोल दिया जाता है..हम आतंकवादी नहीं किसान हैं।
सरकार के पत्र व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर आज 26 दिसबंर को दोपहर 2 बजे सयुंक्त किसान मोर्चा की मीटिंग उसी हॉल में (कजारिया टाइल्स, कुंडली, सिंघु बॉर्डर) आयोजित की जाएगी।
वहीं, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कहा कि सरकार को उम्मीद है कि अगले दौर की बैठक दो-तीन दिनों में हो सकती है। प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं में से एक ने नाम उजागर नहीं करने की इच्छा के साथ कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी की उनकी मांग बनी रहेगी।
संगठनों में से कुछ ने संकेत दिया कि वे मौजूदा गतिरोध का हल खोजने के लिए केंद्र के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला कर सकते हैं। यूनियनों ने कहा कि आज उनकी एक और बैठक होगी जिसमें ठहरी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए केंद्र के न्यौते पर कोई औपचारिक फैसला किया जाएगा।
किसान नेता ने कहा, सरकार के पत्र में कोई प्रस्ताव नहीं है। हमें लगता है कि सरकार हमारी मांगों को समझ नहीं पाई है। इसलिए संभव है कि हम नए सिरे से बातचीत शुरू कर सकते हैं ताकि सरकार अपनी मांगें ठीक से समझा दें। उन्होंने कहा, तीनों कानून रद्द करने की मांग से एमएसपी को अलग नहीं कर सकते। एक अन्य किसान नेता ने कहा, इन कानूनों में निजी मंडियों का जिक्र है। यह कौन सुनिश्चित करेगा कि हमारी फसलों को एमएसपी पर खरीदा जाएगा। शुक्रवार को कई किसान संगठनों ने चर्चा की लेकिन कोई फैसला नहीं लिया जा सका।
दिल्ली की कई सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन आज 32वां दिन है। सरकार के वार्ता के नए प्रस्ताव पर किसान संगठनों की आज बैठक होगी। इस बैठक में किसान संगठन नए वार्ता प्रस्ताव पर फैसला ले सकते हैं।