मास्टर रोड बनाने के लिए 1100 एकड़ जमीन देने वाले ग्रेटर फरीदाबाद के 19 गांवों के किसान मंगलवार को सड़क पर उतर आए और सेक्टर-12 स्थित हुडा कार्यालय पर बैठे भूमि अर्जन अधिकारी राजेंद्र सिंह गहलोत से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर 30 अप्रैल 2013 को बढ़ाई गई मुआवजा राशि की मांग करने लगे।
गहलोत ने मुआवजा देने में असमर्थता जताई तो किसान हुडा कार्यालय के अंदर ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे भूमि अर्जन अधिकारी ने किसानों को 30 मई तक मुआवजा देने का लिखित आश्वासन दिया।
तब जाकर कार्यालय खाली हो सका। किसान संघर्ष समिति नहर पार फरीदाबाद के नेतृत्व में सेक्टर-12 स्थित टाउन पार्क में सुबह 10 बजे ही 19 गांव के किसान एकत्रित हो गए थे।
समिति के अध्यक्ष अमरचंद चंदीला ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद किसानों को हुडा की ओर से मुआवजा रािश देने में आनाकानी की जा रही है, जबकि ग्रेटर फरीदाबाद के किसानों की जमीन का अधिग्रहण 2010 में ही कर लिया गया था।
उस समय किसानों को 42 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा राशि दी गई थी। एक याचिका पर कोर्ट ने जमीन देने वाले किसानों को 1118 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से मुआवजा राशि देने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन इस आदेश पत्र को दरकिनार कर हुडा साल भर से टरका रहा है।
तीन मार्च को हुडा प्रशासक सुप्रभा दहिया के सामने भूमि अर्जन अधिकारी ने 10 दिन में किसानों को मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया था, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। इसलिए अब लिखित लिया गया है।
इस मौके पर लीलू चंदीला, सतपाल नरवत, भरत सिंह नागर, जितेंद्र त्यागी, डॉ. आरएस नागर, किरण पाल चंदीला, जगदीश, नत्थीराम, मनफूल सिंह सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
बिना मुआवजे के कब-कब लौटे किसान
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