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कृषि आंदोलन: रिश्तों की बंधी है डोर, फिर भी आमने-सामने जवान और किसान

Sun, 06 Dec 2020 11:34 AM IST
प्राची प्रियम प्रगति मिश्रा, नोएडा

सार

आंदोलन में शामिल कई किसानों के बेटे और रिश्तेदार पुलिस और सुरक्षा बलों में हैं तैनात। फर्ज निभाने के लिए खड़े हैं एक-दूसरे के सामने 
 
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दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर डटे किसान - फोटो : ANI
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विस्तार
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हमारे घरों के बच्चे ही तो पुलिस आदि सीआरपीएफ आदि में भर्ती होते हैं, नेताओं के नहीं। आज वे ड्यूटी पर तैनात हैं, उन्हें लाठी चलाने को कहा जाएगा तो चलाएंगे, लेकिन दिल से तो हम सब एक-दूसरे से जुड़े हैं। ना हम चाहते हैं कि माहौल खराब हो, ना ही उनकी ऐसी मंशा है। यह कहना है नोएडा में किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप का। 
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उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान न तो वे ऐसा कोई काम करते हैं जिससे पुलिस, सीआरपीएफ या किसी भी आम इंसान को कोई दिक्कत हो, न ही उनकी ओर से हमें परेशान किया जाता है। हमारा एक-दूसरे के साथ दिल का रिश्ता है। वो तो सरकार व प्रशासन ने हमें आमने-सामने खड़ा कर दिया है। 

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर तैनात कई सिपाही ऐसे हैं जो किसान परिवार से हैं। वहीं मोर्चे पर बैठे कई किसानों के बेटे पुलिस और सेना में हैं। किसान और जवान दोनों ही अपने-अपने फर्ज निभाने के लिए डटे हैं। इन्हें फर्ज भी निभाना है और एक-दूसरे का दर्द भी समझना है। ऐसे में दोनों की राहें आसान नहीं हैं।
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मेरा एक बेटा दिल्ली पुलिस में है तो दूसरा यूपी पुलिस में। किसी बॉर्डर पर बेटा फर्ज निभाने के लिए डटा है तो दूसरी ओर हम अड़े हैं। मैं दादरी से हूं। हमारे यहां से कई लोग आए हैं, जिनके बच्चे पुलिस में हैं।
- राजपाल

मेरे भाई पुलिस में है। अपने, अपनों के खिलाफ खड़े हों, अच्छा तो नहीं लगता, लेकिन दोनों को अपना फर्ज निभाना है। सरकार ने हमें आमने-सामने लाकर सही नहीं किया है।
- राजेश यादव

कोई भी पुलिस वाला हो या आर्मी वाला, हमारा बच्चा है। मेरे परिवार में भाई-भतीजे समेत बहुत से लोग पुलिस में हैं। लेकिन हम आंदोलन से जुड़े रहेंगे, क्योंकि यह हमारा कर्तव्य है। पुलिस वाले अपना फर्ज निभा रहे हैं।
- विजय सिंह

मेरे भाई, भतीजे सहित परिवार के कई लोग पुलिस और सेना में हैं। हर पुलिस वाले के लिए दिल में प्यार और सम्मान है, लेकिन आंदोलन में जुड़ना हमारे लिए जरूरी है। यह हमारे हक की लड़ाई है, हमें लड़नी होगी।
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- हरेंद्र सिंह
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