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किसानों को पसंद आई राहुल गांधी की कहानी

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दो महीने बाद किसी मंच पर लोगों से मुखातिब हुए। उन्होंने भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव का असर समझाने केलिए ऑस्ट्रेलिया की यात्रा और वहां के हीरे के खान की कहानी सुनाई।
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जब रैली में आए किसानों व अनुभवी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से  बातचीत की तो उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कहानी सुनाकर बात आसानी से समझा गए।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने किसानों को मकान की नींव की तरह देश की नींव से जोड़कर सधे राजनीतिज्ञ की तरह बात रखी।  मंच पर भट्टा पारसौल के किसानों आने अवसर भी दिया गया।

उन्होंने राहुल गांधी का स्वागत किया। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने भी उनमें से एक किसान को गले लगाया। अपने भाषण में उन्हें अपना दोस्त भी बताया।  आदिवासियों के अलावा भट्टा पारसौल की एक महिला से मुलाकात भी की।
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पहले भाषण में दिखता था बचपना

राजस्थान से आए सेवादल के बुजुर्ग कार्यकर्ता मोतीलाल गहलोत कहते हैं राहुल गांधी ने आत्मविश्वास से भाषण दिया। बिल्कुल प्रधानमंत्री की तरह बोले। कई भाषण सुने हैं। पहले भाषण में बचपने जैसी बात कर देते थे। इस बार बहुत अच्छा बोले। समझाने का तरीका भी अच्छा था।

यूपी के अलीगढ़ से आए अश्वनी शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस उपाध्यक्ष के भाषण में स्थिरता थी। आत्मविश्वास  का तो जवाब ही क्या। किसानों के हर दर्द को भाषण में बयां किया।

छत्तीसगढ़ से आए योगेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने किसान रैली में बिल्कुल प्रैक्टिकल बात रखी। ऑस्ट्रेलिया के हीरे के खान की जो कहानी सुनाई, उसे किसान आसानी से समझ सकता है कि ऐसा ही हाल जमीन छिनने केबाद उनका होने वाला है।
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