बड़ी निराशाजनक बात है कि इतने दिनों के बाद भी ये मसला हल नहीं हो पाया। बातचीत का माहौल तब बन पाएगा जब भारत सरकार तीनों कानून रोक देती है। उसी वक्त शांति हो जाएगी। फिर जब सार्थक माहौल होगा तब सरकार आराम से बैठकें कर बातचीत कर सकती है: SAD नेता दलजीत सिंह चीमा
हमने राष्ट्रपति से मुलाकात की और ज्ञापन प्रस्तुत किया। उसमें हमने कृषि कानूनों और बिजली संशोधन बिल को वापिस लेने की मांग की क्योंकि ये बहुत ही गैर-लोकतांत्रिक और बिना विचार-विमर्श के पारित कर दिए गए थे: सीताराम येचुरी, सीपीआई-एम
कृषि कानून किसान विरोधी है। पीएम ने कहा था कि ये कानून किसानों के हित में हैं, तो फिर किसान सड़क पर क्यों खड़े हैं? सरकार को ये नहीं सोचना चाहिए कि किसान डर जाएंगे और हट जाएंगे। जब तक कानून वापिस नहीं हो जाते तब तक किसान न हटेगा न डरेगा: राहुल गांधी, कांग्रेस
राष्ट्रपति भवन पहुंचने वालों में एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार भी रहे। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी पार्टियों ने सरकार से अनुरोध किया था कि कृषि बिलों में गहराई से बहस हो और इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए लेकिन दुर्भाग्यवश इसे जल्दबाजी में पास कर दिया गया। इस ठंड में किसान सड़कों पर बैठकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए नाखुशी जाहिर कर रहे हैं। यह सरकार का दायित्व है कि उनके मुद्दों को सुलझाएं।
वहीं राष्ट्रपति से मिलने के लिए पहुंचे राहुल गांधी ने भी कहा कि हमने राष्ट्रपति से कहा है कि इन किसान विरोधी कानूनों को वापस लिया जाए।
विपक्षी दलों के नेताओं ने आज राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। सीपीआई-एम के नेता सीताराम येचुरी ने बताया कि हमनें राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है। हमने उनसे अपील की है कि कृषि कानूनों और बिजली संशोधन विधेयक जिन्हें गैर लोकतांत्रिक तरीके से पास किया गया था उन्हें वापस लिया जाएं।
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर गृहमंत्री अमित शाह के निवास पर पहुंचे। जानकारी के अनुसार किसान आंदोलन को लेकर चर्चा के लिए कृषि मंत्री गृहमंत्री से मिलने गए हैं।
किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हमने सरकार के सभी प्रस्ताव ठुकरा दिया है। क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि, जो सरकार की तरफ से प्रस्ताव आया है उसे हम पूरी तरह से रद्द करते हैं। इसके अलावा अन्य नेताओं ने भी प्रेस को संबोधित किया जिसकी प्रमुख बातें निम्न हैं-
कृषि कानूनों को लेकर विपक्षी नेता राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे हैं।
किसानों मुद्दा उठाया था कि कृषि अनुबंधों के पंजीकरण की व्यवस्था नए कानून में नहीं है। केंद्र ने प्रस्ताव दिया है कि जब तक राज्य सरकारें रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं करतींं तब तक एसडीएम को लिखित हस्ताक्षरित करार की प्रतिलिपि 30 दिन के भीतर संबंधित एसडीएम को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
निजी मंडियों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था संशोधन के जरिए रखने का प्रस्ताव दिया गया है। किसानों को आपत्ति थी कि नए कानून से स्थापित मंडियां कमजोर होंगी और किसान निजी मंडियों के चंगुल में फंस जाएंगे।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह राज्य सरकारों को अधिकार देगी ताकि किसानों के हित में फैसला लिया जा सके और व्यापारियों पंजीकरण कराना ही होगा।
किसानों का मुद्दा था कि उसकी भूमि की कुर्की हो सकेगी लेकिन सरकार का कहना है कि किसान की भूमि की कुर्की नहीं की जा सकती।
किसानों डर है कि उनकी भूमि उद्योगपति कब्जा कर लेंगे, जिसका समाधान सरकार ने प्रस्ताव में दिया है।
किसानों की मांग थी कि कृषि कानूनों में किसानों को विवाद के समय कोर्ट जाने का अधिकार नहीं दिया गया है, जो दिया जाना चाहिए। सरकार इस पर राजी हो गई है।
पढ़ें क्या कहती है सरकार कानून खत्म करने को लेकर।
सरकार ने प्रस्ताव में कहा है कि वह बिजली संशोधन बिल 2020 नहीं लाएगी। यह किसानों प्रमुख मांगों में से एक है।
सरकार ने किसानों के सबसे बड़े मुद्दे एमएसपी पर कानून लाने की जगह उस पर लिखित में आश्वासन देने की बात कही है।
किसानों ने बताया है कि उनके पास केंद्र सरकार ने 19 पन्नों का लिखित प्रस्ताव भेजा है जिसमें किसानों की मांग के आधार पर सरकार ने समाधान का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव के मिलने के बाद किसानों की बैठक लगातार जारी है। हालांकि इस बीच किसान नेता कह रहे हैं कि ये वही प्रस्ताव हैं जो पांचवीं दौर की वार्ता के दौरान भी सरकार ने रखा था।
किसानों ने सरकार का लिखित प्रस्ताव मीडिया के सामने दिखाया है। पूरा प्रस्ताव हिंदी में लिखा है।
कृषि कानूनों के विरोध में रैली निकालने जा रहे सपाइयों को पुलिस ने रोक लिया l सपा के एमएलसी जसवंत सिंह यादव और पूर्व जिला अध्यक्ष ओमवती यादव जब अपने समर्थकों के साथ अपने गांव रतीभानपुर पर एकत्रित हुए और प्रदर्शन करने जा रहे थे, तो सिकंदराराऊ पुलिस ने इन्हें गांव से बाहर नहीं जाने दियाl
चिल्ला बॉर्डर पर किसान आज दोपहर में नुक्कड़ नाटक करेंगे। इस नाटक का नाम है 'कृषि बिल पर किसान और सरकार की रस्साकशी'। कल यहीं किसानों ने भजन कीर्तन का कार्यक्रम आयोजित किया था।
राकेश टिकैत ने सरकार के लिखित प्रस्ताव मिलने की बात पूछे जाने पर कहा है कि हमारी बैठक में हम अपनी रणनीति तय करेंगे और सरकार के प्रस्ताव पर भी विमर्श करेंगे। किसान वापस नहीं जाएंगे, ये उनके सम्मान की बात है। क्या सरकार कानून वापस नहीं लेगी? क्या ये अत्याचार होता रहेगा? अगर सरकार जिद्दी है तो किसान भी हैं। ये कानून वापस लेना ही पड़ेगा।
नोएडा-दिल्ली के चिल्ला बॉर्डर पर बुधवार को यातायात दोनों तरफ से प्रभावित है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी दलों के नेताओं के राष्ट्रपति से मिलने के सवाल पर कहा कि, 'राहुल गांधी, शरद पवार जी और विपक्षी नेता जिन्होंने किसान को दिवालिया बना दिया वो अब किसान के नाम पर राष्ट्रपति महोदय के यहां जा रहे हैं। इन्हें तो किसानों से माफी मांगनी चाहिए, ये किसानों की बदहाली के लिए जवाबदार लोग हैं।
कृषि बिल को वापस लेने और किसान आंदोलन को लेकर 24 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि आज राष्ट्रपति से मिलेंगे। इसे लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया था कि, 'राष्ट्रपति जी से किसान विरोधी कानून को वापस लेने के लिए 24 राजनीतिक दलों का डेलीगेशन आज मिलने जा रहा है। मुझे महामहिम जी से कोई उम्मीद नहीं है। इन 24 राजनीतिक दलों को एनडीए में उन सभी दलों से भी चर्चा करना चाहिए जो किसानों के साथ हैं। नितीश जी को मोदी जी पर दबाव डालना चाहिए।' उनके इस ट्वीट को लेकर जब दिग्विजय सिंह से एएनआई ने बात की तो वह बोले, 'हां राष्ट्रपति इस मामले में क्या कर सकते हैं?'
किसान आंदोलन को लेकर सरकार के रवैये पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोदी जी को अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए। यह किसानों का मामला है इस तरह की जिद किसी के लिए ठीक नहीं है। तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। इसके लिए एक संयुक्त संसदीय समिति की स्थापना करनी चाहिए जो किसानों से बात करने के बाद इस समस्या का हल ढूंढेगी।
किसान आंदोलन को लेकर क्या कदम उठाने चाहिए इसके लिए केंद्रीय कैबिनेट की बैठक जारी है। इसमें किसानों को मनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
ऑल इंडिया किसान सभा के जनरल सेक्रेटरी हन्नान मोल्लाह ने कहा कि सरकार ने कहा था कि वह आज कुछ लिखित में भेजेंगे। हमने उन्हें बता दिया है कि वह लिखित में भेजेंगे तो हम उस पर गौर करेंगे। हमारी दोपहर 12 बजे एक बैठक है। एक व्यापक कमेटी इस पर चर्चा करेगी। अगर लिखित में संशोधन पर बात होगी तो हमारा पक्ष बिल्कुल स्पष्ट है। अगर यह बिल को वापस लेने पर है तब हम उसे संज्ञान में लेकर उस पर विचार कर सकते हैं। छठे दौर की वार्ता रद्द हो चुकी है। अगर पत्र आता है और हमें सकारात्मकर लगता है तो कल बैठक हो सकती है।
दलित प्रेरणास्थल के सामने आज भी लंबा जाम लग गया है। यहां किसान कृषि कानूनोंं के विरोध में बैठे हैं।
शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ता दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे पर स्थित पेट्रोल पंप से दिल्ली जाने वाले किसानों को उनके ट्रैक्टर के लिए मुफ्त में पेट्रोल डीजल मुहैया करा रहे हैं। इस बारे में शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ता गुरशरण सिंह ने बताया, हमने यह अभियान इसलिए शुरू किया है ताकि पंजाब के ज्यादा से ज्यादा लोगों को किसानों के आंदोलन में जाने के लिए प्रेरित कर सकें। इससे यह आंदोलन मजबूत होगा। हम यहां ये काम स्थानीय युवाओं और हमारे एनआरआई दोस्तों की मदद से कर रहे हैं।
टीकरी, झरोडा, धांसा बॉर्डर आज पूरी तरह से बंद रहेगा। झटीकरा बॉर्डर सिर्फ दो पहिया वाहन और पैदल यात्रियों के लिए खुला है।
दिल्ली पुलिस को इनपुट मिला है कि किसान आज नई दिल्ली जिले में कुछ हंगामा कर सकते हैं। इसे लेकर पुलिस पूरी तरह से सतर्क है और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
किसानों के प्रदर्शन का आज 14वां दिन है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर बताया है कि सिंघु, औचंदी, पियाऊ मनियारी और मंगेश बॉर्डर आज भी बंद रहेंगे। एनएच-44 भी दोनों तरफ से बंद हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि अन्नदाता हमारे देश की रीढ़ हैं, अन्नदाता की रक्षा हर कीमत पर की जानी चाहिए। कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर हमारे अन्नदाता की रीढ़ तोड़ने वाले कानूनों का समर्थन नहीं करेगी। हम अन्नदाता के समर्थन में खड़े होकर उनकी लड़ाई लड़ेंगे।
आज सिंघु बॉर्डर पर दोपहर 12 बजे किसान नेताओं की बैठक होगी। हन्नान मोल्लाह ने कहा कि अमित शाह ने हमसे कहा कि सरकार जो संशोधन करना चाहती है वह उसे लिखित में देगी। हम तीनों कानूनों को निरस्त कराना चाहते हैं, बीच का कोई रास्ता नहीं है।
वहीं, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि आज सरकार और किसान संगठनों के बीच बैठक नहीं होगी। सरकार कृषि कानून वापस लेने को तैयार नहीं है। मंत्री (अमित शाह) ने कहा है कि आज किसान नेताओं को प्रस्ताव दिया जाएगा। किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर इस प्रस्ताव को लेकर बैठक करेंगे।
गृह मंत्री अमित शाह और कुछ किसान नेताओं के बीच मंगलवार की रात हुई बैठक विफल रहने के बाद सरकार और किसान यूनियनों के बीच बुधवार को प्रस्तावित छठे दौर की वार्ता अधर में लटक गई है। हालांकि, सरकार की ओर से बुधवार की वार्ता के संबंध में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है लेकिन अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद कुछ किसान नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित बैठक में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। इन नेताओं ने कहा कि सरकार के लिखित प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद ही अगले कदम पर निर्णय लिया जाएगा।