जमीन देने के बावजूद किसान मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। मंगलवार को मुआवजे के लिए प्रशासन और आईएमटी किसानों के बीच बैठक हुई। इसमें एसडीएम ने किसानों से लिखित शिकायत लेकर सरकार के पास भिजवाने का आश्वासन दिया।
बता दें, छह जुलाई 2008 में एचएसआईआईडीसी ने इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) बनाने के लिए पांच गांव नवादा, मुजैडी, मच्छगर, चंदावली और सोतई गांव के लगभग 26 सौ किसानों की करीब 1832 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था।
विभाग ने किसानों को 16 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया। मुआवजा कम होने के विरोध में किसानों ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने चार सितंबर 2014 को किसानों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए अधिगृहित की गई जमीन का 1230 रुपए प्रतिवर्ग गज की दर से मुआवजा देने का आदेश एचएसआईआईडीसी को दिया।
इस फैसले के मुताबिक किसानों को करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा मिलना चाहिए लेकिन कई साल बीत जाने के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है।
अधिकारियों के यहां बार-बार गुहार लगाने के बाद अंत में किसानों ने गत माह ही एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक से भी मुलाकात की लेकिन वह भी व्यर्थ रही। बैठक में प्रबंध निदेशक ने किसानों को 10 जून तक 200 करोड़ रुपए मुआवजे की रकम भेजने का वादा किया था, लेकिन केवल 94 करोड़ रुपये ही भेजे गए।
मंगलवार को एसडीएम कार्यालय में हुई बैठक में एसडीएम डा. प्रियंका सोेनी, जिला राजस्व अधिकारी कुलवीर सिंह ढाका, एचएसआईआईडीसी के कार्यकारी अभियंता डीएस भट्टी मौजूद हुए।
उनके साथ चली किसानों की दो घंटे की बैठक में जल्द मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया गया। इस मौके पर प्रधान रामनिवास नागर, जगदीश, ब्रहमसिंह, कुलदीप यादव, कुंदन, तेजसिंह सहित कई किसान उपस्थित हुए।