ईसापुर गांव में फसल काटती महिलाएं
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लॉकडाउन में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर तो उन्हें गेहूं की कटाई के लिए न तो मजदूर मिल रहे हैं और न ही मंडी में फसलों का सही दाम। हालात यह हैं कि किसान 1925 के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम 13 सौ 17 सौ प्रति कुंतल पर अनाज की बिक्री करने को विवश हैं। मंडी तक फसल पहुंचाने के लिए भी किसानों को अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
नजफगढ़ के इलाके में ईसापुर तथा ढांसा समेत कई गांवों में मजदूरों की कमी की वजह से किसान खुद गेहूं की कटाई कर रहे हैं या पुराने मजदूर और कंबाइन का सहारा ले रहे हैं। इस पर किसानों का खर्च अधिक हो रहा है, लेकिन मंडी तक पहुंचाने पर भी आढ़ती से उचित भाव नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। कंबाइन की मदद से फसलों की कटाई हो रही है तो दूसरी तरफ माल ढुलाई के रेट में भी बढ़ोतरी का असर किसानों की जेब पर पड़ रहा है।
भारतीय किसान यूनियन, दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र डागर ने बताया कि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 है जबकि सरसों का 4425 रुपये प्रति क्विंटल है। फसलों की खरीद के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) या किसी अन्य एजेंसी के न पहुंचने की वजह से किसानों को उचित रेट नहीं मिल रहा है। किसानों को न तो फसलों पर एमएसपी का लाभ मिल रहा है और न ही प्रदेश सरकार की ओर से किसी तरह की राहत दी जा रही है। ऐसे में किसानों के लिए परेशानी बनी हुई है। ऐसे हालात में किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए राहत की घोषणा होनी चाहिए।
रोजाना मंडी में पहुंच रहे हैं 175 ट्रैक्टर
नजफगढ़ की अनाज मंडी में लॉकडाउन के दौरान फसलों की आवक को सीमित कर दिया गया है। अब रोजाना 175 ट्रैक्टर या ट्रक ही अनाज मंडी में प्रवेश कर रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से 150 वाहनों की संख्या को बढ़ाकर 200 करने की मांग की थी, जिसे अब बढ़ाकर 175 कर दिया गया है।