ग्रेटर फरीदाबाद के किसानों ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले
का स्वागत किया है। जिसमें प्रदेश सरकार को झटका देते हुए गुड़गांव में
डीएलएफ की डील को रद्द कर दिया गया है। इस संबंध में सेक्टर-75 व 80 के लिए
जमीन देने वाले ग्रेटर फरीदाबाद के पांच गांव के किसानों ने रविवार को
ग्रेटर फरीदाबाद किसान संघर्ष समिति के सेक्टर-9 स्थित कार्यालय पर एक बैठक
की।
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शिवदत्त वशिष्ठ ने कहा कि नहर पार
के किसान अगर संघर्ष नही करते तो उनकी जमीनों को भी सरकार बिल्डराें को
मोटे मुनाफे में बेच देती। डीएलएफ लैंड डील मामले में हाई कोर्ट का फैसला
आने के बाद हरियाणा सरकार का चेहरा बेनकाब हो गया है। 350 एकड जमीन सरकार
ने 1703 करोड़ रुपये में डीएलएफ को थमा दी। जिसकी मौजूदा बाजारू कीमत 15
हजार करोड़ रुपये से अधिक है।
इसी प्रकार से नहर पार ग्रेटर
फरीदाबाद के सेक्टर-75 व 80 के पांच गांवों की 63,8क़ड जमीन पर धारा चार
लगा कर उसमें से 342 एकड जमीन का ही अवॉर्ड सुनाया गया। बाकी जमीन को
बिल्डराें को मोटे मुनाफे में सीएलयू दे दिया गया।
उसके बाद से
किसान अपनी जमीन को बचाने के लिए 6-7 साल से संघर्षरत हैं। इसी कारण आज तक
किसानों की जमीन पर सरकार की ओर से कब्जा तक नहीं किया जा सका। न ही
किसानों ने सरकार का तय मुआवजा ही उठाया है। इस फैसले से किसानो में एक
उम्मीद जगी है। उन्हें भी उच्च न्यायालय से उम्मीद है कि उनकी जमीन वापस
दिलाई जाए। इस मामले पर जल्द ही कोर्ट में गुहार लगाई जाएगी।