सरसों की सरकारी खरीद शुरू न होने के चलते किसानों का तेल निकल रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य से भी कम पर अपनी फसल बेचने पड़ रही है। किसानों का कहना है कि पिछले साल की अपेक्षा इसबार सरसों की पैदावार अधिक है। लेकिन इसबार मंडी में सरसों के खरीदार नहीं मिल रहे है। जिसके कारण उन्हें कम मूल्य में फसल बेचने पड़ रही है।
बता दें कि, इस बार जिले के करीब 1100 हेक्टेयर जमीन पर सरसों की बुवाई की गई थी। इस साल न तो ज्यादा पाला पड़ा है न ही कोहरा पड़ा है। इसके चलते सरसों की अधिक पैदावर हुई। सरसों पक कर खड़ी हो गई।
काफी किसान निकालकर इसे मंडी में बेचने लाने लगे हैं। लेकिन, मंडी में उन्हें खरीददार नहीं मिल रहे है। जिसके कारण किसान को अपनी फसल समर्थन मूल्य से भी कम में बेचने पड़ रही है।
इस साल पकाव अच्छा हुआ है। लेकिन इसके बावजूद मंडी में सरसों का भाव कम मिल रहा है। आढ़ती सरसों में गीला होने के नाम कटौती करते हैं। सरसों को 3300 रुपये प्रति क्विंट तक खरीद रहे हैं। -अमजद, गांव धौज
हमारी मंडी में ज्यादा सरसों नहीं आती। किसान खेत से सीधे गीली सरसों लेकर मंडी ला रहे हैं। गीली सरसों कोई खरीदने के लिए तैयार नहीं है। इससे नुकसान होता है, क्योंकि जब सरसों सूख जाती है तो वजन घट जाता है। घटे हुए वजन का नुकसान आढ़ती को उठाना पड़ता है। -सुनील भारद्वाज, प्रधान आढ़ती एसोसिएशन
मंडी में अभी तक सरसों की खरीद शुरू नहीं हुई है। हालांकि अभी ज्यादा सरसों नहीं आ रही है। मंडी में रोजाना दो या तीन ढेरी आती हैं। सरसों का सरकारी समर्थन मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल है। किसान को थोड़ा इंतजार करना चाहिए। -राहुल यादव, सचिव मार्केट कमेटी बल्लभगढ़