स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल इस औद्योगिक नगरी में प्रतिदिन करीब 20 फीसदी पानी बर्बाद हो रहा है। वाहनों के धुलाई सेंटरों की लगातार बढ़ रही संख्या और पाइपलाइनों में लीकेज से यह समस्या पैदा हो रही है।
पानी रिचार्ज की समुचित व्यवस्था न होने के कारण हर साल जलस्तर 10 फीट नीचे जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों ने इस पर चिंता जताई है और आने वाले समय में जिले में पानी संकट का अंदेशा भी जताया है।
ज्ञात हो कि नहरपार इलाके में बनी 22 सोसायटियों के निर्माण और वहां रहने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में बोर किए जा रहे हैं। इसके अलावा पूरे शहर में हुडा, निगम और पानी माफिया बोर करके पानी का दोहन करने में जुटे हैं।
जल संरक्षण की अपेक्षा दोहन अधिक होने के कारण जलस्तर तेजी से गिरता जा रहा है। खास बात यह है कि जल माफिया अधिकारियों की मिलीभगत से पानी का अवैध कारोबार करने में जुटे हैं।
सेव अरावली के सदस्य एवं पर्यावरण प्रेमी जितेंद्र भड़ाना और कुमार शास्वत का कहना है कि यदि इसी तरह पानी का दोहन होता रहा तो आने वाले दिनों में हमें पानी के घोर संकट से जूझना पड़ सकता है।
नगर निगम के अधीक्षण अभियंता अनिल मेहता का कहना है कि शहर में सप्लाई होने वाले पानी में 20 फीसदी पानी की बर्बादी हो रही है। इसका प्रमुख कारण नलों की टोटी खुली छोड़ देना, पाइपलाइन में लीकेज, अवैध कनेक्शन शामिल हैं।
1400 से अधिक धुलाई केंद्र
जानकारों के मुताबिक एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ जोन में 1400 से अधिक धुलाई सेंटर बने हुए हैं। यहां बाइक से लेकर बड़ी गाड़ियों तक की धुलाई होती है। एक अनुमान के मुताबिक एक सेंटर पर दिनभर में 50 से 80 गाड़ियों की धुलाई की जाती है। इन सेंटरों पर बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी हो रही है लेकिन उसे रोकने वाला कोई नहीं है। हैरानी की बात यह है कि निगम को पता ही नहीं कितने धुलाई सेंटर चल रहे हैं।
घरेलू कनेक्शन पर कर रहे व्यवसायिक उपयोग
निगम सूत्रों की मानें तो धुलाई सेंटर संचालकों ने घरेलू पानी कनेक्शन ले रखा है लेकिन इस कनेक्शन से व्यवसाय कर रहे हैं। गाड़ियों की धुलाई के बदले पैसे कमाए जा रहे हैं। धुलाई सेंटर संचालक बाइक की धुलाई का 50 रुपये और छोटी कार की धुलाई 120 रुपये से लेकर 250 रुपये तक फिक्स है।
हर साल 1 फुट नीचे जा रहा है पानी
नहरपार इलाके में 6 साल पहले 65 फीट पर पानी मिल जाता था वह अब 90 फीट तक पहुंच गया है। एनआईटी इलाके में 220 फीट के बजाय अब 350 फीट पर पानी मिल रहा है। जबकि सूरजकुंड इलाके में वर्ष 2009 में 350 फीट पर था अब वह 450 फीट नीचे पहुंच गया है।