10 दिनों से आंदोलन कर रहे किसान दिल्ली-गाजीपुर सीमा पर भी जमे हुए हैं। नए कृषि कानून को रद्द कराने के लिए अब किसानों के तेवर तल्ख हो गए हैं। उन्होंने एलान कर दिया है कि बगैर मांग पूरी हुए वह राजधानी की सीमाओं को नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि ये अध्यादेश नहीं, किसानों के डेथ वारंट हैं। केंद्र सरकार कानूनों को वापस नहीं लेती है तो वह दिल्ली का दाना-पानी बंद कर देंगे। सरकार इन्हें वापस लेने में जितना देरी करेगी, उतनी ही आंदोलन की तीव्रता बढ़ती जाएगी।
भारत किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार कानूनों को वापस ले और एक नया मसौदा तैयार करे। नए कानूनों को कॉरपोरेट के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वहीं, तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तेजिंदर सिंह विर्क ने कहा कि नया कृषि कानून किसानों के लिए डेथ की तरह है। अगर सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती है तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम करेंगे और दिल्ली का दाना-पानी बंद कर देंगे। सड़कों को अवरुद्ध करना सिर्फ पहला कदम है।
यदि सरकार शनिवार को नहीं मानती है तो हम कल अगले कदम के बारे में विचार करेंगे। सरकार को कानून बनाने से पहले किसान संगठनों से सलाह लेनी चाहिए थी। इनके अलावा संगठन के सदस्य हरकीरत सिंह ने कहा कि सरकार तीनों कानून को बिना किसी संशोधन के वापस ले। साथ ही पराली जलाने पर जुर्माने को हटाए। अभी काफी संख्या में किसान और एकत्र होंगे, सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
पीएम की सद्बुद्धि के लिए हवन
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने गाजीपुर बॉर्डर पर हवन कर आक्रोश प्रकट किया। किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए पूजा-पाठ किया। इस दौरान पंकज राय ने कहा कि किसानों की मांगों को सरकार सुन नहीं रही है। हम चाहते हैं कि सभी के बीच सुख शांति बनी रहे। भगवान शनिदेव पीएम मोदी को सद्बुद्धि दें और किसान भाइयों की मांगें पूरी करें।
कंगना रनौत का विरोध, पुलिस से झड़प
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के युवा किसानों ने कंगना रनौत का विरोध किया। इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों से झड़प भी हुई। वरिष्ठ किसानों और पुलिस अधिकारियों ने मामले को शांत कराया। सुरविंदर किसान ने कहा कि कंगना को महिलाओं के खिलाफ गलत टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। इस मामले में कंगना को माफी मांगना चाहिए।
ना कंबल के सर्द रातें गुजार रहीं बुजुर्ग महिलाएं
शाहजहांपुर से आंदोलन में शामिल होने आईं बुजुर्ग महिलाएं सर्द रातें बिना कंबल के गुजार रही हैं। बिकाना ने कहा कि वे सरकार से अपना हक मांगने आई हैं। जब उनसे रात में ठहरने के दौरान हो रही परेशानी के बारे में पूछा गया तो वो भावुक हो उठी। उन्होंने बताया कि बिना कंबल के कारण रात में ठंड तो लगती है, लेकिन अपना हक संघर्ष से ही मिलता है। वहीं, रामकली ने कहा कि एक ट्रॉली 20 से अधिक महिलाएं रात को सोती हैं। कंबल न होने के कारण रात को तेज ठंड लगने लगती है। प्रशासन को कंबल मुहैया कराने चाहिए।