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दिल्ली के बॉर्डरों पर लगातार बढ़ रही किसानों की संख्या, सामाजिक संगठनों से लेकर स्कूली बच्चे भी कर रहे समर्थन

Mon, 28 Dec 2020 09:49 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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दिल्ली की सीमाओं पर 33वें दिन भी डटे रहे किसान - फोटो : अमर उजाला
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कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर 33 दिन से किसान टिकरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं। समाज के कई तबकों के लोगों का अन्नदाताओं को समर्थन मिल रहा है। किसानों का कहना है कि आंदोलन को हर दिन मजबूती मिल रही है। यहां उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। उम्मीद है कि जल्द ही वह इस लड़ाई में जीत हासिल करेंगे। 

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सोमवार को अन्नदाताओं के समर्थन में टिकरी बॉर्डर पर सरकारी स्कूलों के छात्र और कई सामाजिक संगठन भी पहुंचे। सभी ने एक स्वर में सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने कि मांग की।  बच्चों ने गीत के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई, और अन्य लोगों से भी आंदोलन में जुडने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो किसान पूरे देश का पेट भरता है। वह इस वक्त परेशान हैं ऐसे समय में सभी को उनका साथ देना चाहिए। 

मंच पर मौजूद किसान नेता बलविंदर सिंह ने कहा कि एक माह से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी किसान अपनी मांग को लेकर दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं। उनका हौसला हर दिन बढ़ रहा है। आंदोलन भी पहले के मुकाबले मजबूत होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ आगामी बैठक में अगर कोई निर्णय नहीं निकला तो आंदोलन ऐसे ही चलता रहेगा। 
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किसानों से आत्महत्या न करने की अपील
लगातार हो रही आत्महत्याओं का संज्ञान लेते हुए किसान नेताओं ने उनके साथियों से ऐसा कदम न उठाने कि अपील की है। किसान नेता अनूप चनौत ने कहा कि इस संघर्ष में मजबूती के साथ डटे रहना जरूरी है। किसान ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएं, जिससे उनके परिवार वालों को परेशानी का सामना करना पड़े।

सरपंच के परिवार ने 21 हजार रुपये दान किए
हरियाणा के  हसार जिले के छान गांव के सरपंच प्रतिनिधि राममेहर के परिजनों ने सोमवार को टिकरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में सहायता देने के लिए 21 हजार रुपये दान किए। सात दिसंबर को राममेहर यहां आ रहे थे, लेकिन एक सड़क हादसे में उनकी जान चली गई थी।

दिल्ली की जनता से अपील, इस बार किसानों के साथ मनाएं नया साल 

कृषि कानूनों को लेकर पिछले करीब एक माह से भी अधिक समय से धरने पर बैठे किसानों ने सोमवार को गाजीपुर बॉर्डर पर आह्वान किया कि वह नए साल का जश्न अपने-अपने परिवारों के साथ बॉर्डर पर ही मनाएंगे। किसान नेताओं ने दिल्ली वासियों से भी अपील की है कि वह भी इस साल नए साल का जश्न किसानों के साथ मिलकर मनाएं और उनको हौसले को बढ़ाएं। गाजीपुर में धरने का संचालन कर रही कमेटी ने ऐलान किया कि इसके लिए बकायदा तैयारी की जा रही है। 

महिलाओं को यहां सुविधाएं देने और उनके रहने-सहने के इंतजाम के लिए एक अलग कमेटी भी गठन भी कर दिया गया है। बाकी जगहों की तरह गाजीपुर बॉर्डर पर भी पिछले कई दिनों से क्रमिक अनशन का सिलसिला जारी है। सोमवार को मंच पर 11 किसान अनशन पर बैठे थे। डॉक्टरों ने अनशन कर रहे किसानों का मेडिकल चेकअप कर उनकी रिपोर्ट प्रशासन को भेजी।

संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन (दोआब-पंजाब) के अध्यक्ष मंजीत सिंह राय ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार की नियत ठीक नहीं है। अब सरकार के इशारे पर किसानों के खिलाफ मुकदमें भी दर्ज होने लगे हैं। उत्तराखंड में दिल्ली की ओर कूच कर रहे 1500 से अधिक किसानों के खिलाफ मुकदमें दर्ज कर लिये गए। उन्होंने कहा कि कोई भी किसान इस तरह के मुकदमों से न डरे। 

मंजीत  संयुक्त किसान मोर्चा के कुलदीप सिंह बाजीतपुर और अमरजीत सिंह कालहा के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर आगे की रणनीति बनाने पहुंचे थे। इन लोगों ने कहा कि जहां-जहां भी किसानों के खिलाफ मुकदमें दर्ज हो रहे हैं, किसान अब उन इलाकों का घेराव करेंगे। किसान नेताओं ने मंच से यह भी ऐलान कर दिया कि किसी भी एक्टिव नेता को मंच पर नहीं चढ़ने दिया जाएगा।व् यदि कोई नेता यहां आना चाहता है तो वह साधारण किसान का बेटा बनकर यहां आकर बैठे। उसे मंच से विचार रखने की इजाजत नहीं होगी। मंच का संचालन कर रही कमेटी की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार जब तक एमएसपी पर कानून बनाने के अलावा तीनों कानूनों को रद्द नहीं करेगी तब तक उनका आंदोलन ऐसे ही जारी रहेगा।
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गाजीपुर बॉर्डर पर भी बढ़ रही किसानों की संख्या 

कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बॉर्डर पर धरने की शुरूआत किसान नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में हुई थी। पहले इसे पश्चिम उत्तर-प्रदेश के मुट्ठी भर किसानों का धरना बताया गया, लेकिन देखते ही देखते बॉर्डर पर किसानों की भीड़ बढ़ती ही चली गई। अब यहां यूपी, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट् के अलावा कुछ अन्य राज्यों के किसान भी पहुंच रहे हैं। शुरूआत में गाजीपुर पुल (एनएच-24) के नीचे ही किसान धरने पर बैठे थे, लेकिन धरे-धरे किसान पुल के ऊपर गाजियाबाद ही ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। अब हालात यह है कि गाजीपुर धरना स्थल से करीब पौन किलोमीटर के एरिये में किसानों के ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर ही दिखाई देते हैं।

दिन के समय में दिल्ली-एनसीआर के लोग बड़ी संख्या में यहां घूमने आ आते हैं। बॉर्डर पर किसानों की जरूरत के हर सामान को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। खाने-पीने के अलावा गर्म पानी के देसी गीजर, कंबल, रजाई, सर्दी से बचने के हर तरह के कपड़े का इंतजाम यहां हो चुका है। सड़क पर दूर तक किसी कबीलों की तरह से दिखने वाले तंबू लगे हैं। यहां जगह-जगह हुक्के और चाय के साथ सरकार से लड़ने की रणनीति तैयार होती रहती है।

बकायदा किसान आंदोलन का संचालन कर रही कमेटी के वालंटियर ने पूरे आंदोलन को संभाला हुआ है। साफ-सफाई से लेकर हर चीज का यहां ख्याल रखा जा रहा है। नौजवानों के साथ बुजुर्ग किसान भी यहां आंदोलन कर सरकार से लोहा ले रहे हैं। लंगर के अलावा मेडिकल कैंप, एंबुलेंस यहां 24 घंटे तैनात रहती हैं।
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