शहर में अवैध कालोनियों की बाढ़ सी आ गई है। करीब 250 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां शहर में हैं लेकिन इनमें अब सभी सुविधाएं मुहैया हैं। कॉलोनाइजर खेती की और सरकारी जमीनों पर प्लॉटिंग कर कॉलोनियां बसा देते हैं और नगर निगम इन कॉलोनियों में सड़क, सीवर, जल निकासी, पेयजल, स्ट्रीट लाइट समेत सभी सुविधाएं मुहैया करा देता है।
यह कॉलोनियां जिन वार्ड में आती हैं, उनके पार्षद ऐसी अवैध कॉलोनियों में विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव नगर निगम में भेजते हैं। अधिकांश मामलों में कॉलोनाइजर क्षेत्रीय पार्षदों से साठगांठ कर विकास कार्य करा लेते हैं और उनके लाखों रुपये बच जाते हैं। जबकि नगर निगम को ऐसी कॉलोनियों से टैक्स नहीं मिलता।
पूर्व पार्षद मुकेश त्यागी ने कहा कि मेरठ रोड स्थित करीब पांच हजार वर्ग मीटर जमीन लोगों ने कब्जा रखी है। इनमें से जमीन के कुछ हिस्से पर बाउंड्रीवॉल कराकर घेराबंदी कर ली गई है और इस पर व्यावसायिक गतिविधि की जा रही है। अन्य जमीन पर भवन बन चुके हैं।
नगर निगम ने इस सरकारी जमीन पर बने भवनों पर हाउस टैक्स लगा दिया है। इसके दस्तावेज मेरे पास भी हैं और नगर निगम के पास भी। कर्मचारियों की साठगांठ से सरकारी जमीनों पर बने मकानों पर टैक्स लगाने का खेल चल रहा है। ऐसे मामले जब कोर्ट में जाते हैं तो नगर निगम का दावा कमजोर हो जाता है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि सरकारी जमीन पर बने भवनों पर टैक्स लगने की शिकायत मिली है। इस प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।