टीकरी बॉर्डर के लेबर चौक पर काम करने वाले सैकड़ो मजदूर काम से हाथ धो बैठे हैं। वो माल ढुलाई का काम कर अपने परिवार का पेट पालते थे। लेकिन बॉर्डर पर किसानों की दस्तक से उनका काम धंधा चौपट हो गया है। पिछले 12 दिनों से उनके लिए दो जून की रोटी का बंदोबस्त करना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि वह तो किसान आंदोलन के लंगर में खा लेते हैं। लेकिन पत्नी और बच्चों के लिए खाने का बंदोबस्त करना मुश्किल है। वो चाहते हैं कि सरकार किसानों की मांगे जल्द मान ले और इस आंदोलन को खत्म कराए।
लेबर चौक पर काम की तलाश में दिनभर बैठे रहते हैं मजदूर
- टीकरी बॉर्डर पर सामान लोडिंग का काम करके दिनभर में 500 से 600 रुपया कमा लेता हूं। लॉकडाउन में अपने गांव चला गया था, जब सबकुछ फिर खुला तो पत्नी बच्चों को फिर दिल्ली ले आया, लेकिन किसान आंदोलन ने फिर काम छीन लिया - राधेश्याम, दिहाड़ी मजदूर
- सरकार तारीख पे तारीख बढ़ा रही है, इस किसान आंदोलन का कोई फैसला हो नहीं रहा है। लेकिन इसकी वजह से लाखों लोगों को परेशानी हो रही है। हम यहां रोज सुबह से शाम तक आकर बैठते हैं, कि हो सकता है किसी को कोई काम हो तो वो हमें ले जाए - अशोक कुशवाहा, दिहाड़ी मजदूर
- दस बारह दिन से किसान आंदोलन चल रहा है, अब तो सरकार इसका फैसला कर दे। हम लोग इसके चलते फिर से सड़क पर आ गए। त्योहारों पर काम अच्छा चल रहा था तो परिवार को साथ लेकर आ गए, अब समझ में नहीं आ रहा क्या करें - वृजेश, दिहाड़ी मजदूर
- हम तो रोज कमाने खाने वाले लोग हैं, इसमें हम लोगों की क्या गलती है जो हम लोग इसमें पिस रहे हैं। सरकार इसका हल क्यों नहीं कर रही समझ में नहीं आ रहा है। - अशोक वर्मा, दिहाड़ी मजदूर