गौतमबुद्ध नगर से रेवाड़ी तक रेलवे फ्रेट कॉरिडोर कॉरिडोर परियोजना निर्माण कार्य में खटाई पड़ती नजर आने लगी है। बृहस्पतिवार को किसान और रेलवे अधिकारियों के बीच करीब दो घंटे चली बैठक बेनतीजा रही।
किसान बाजार भाव से अधिग्रहित जमीन का रेट लेने के बाद कब्जा देने की मांग पर अड़े रहे। जबकि रेलवे किसानों से अपनी जमीन पर कब्जा छोडने का मान-मनौव्वल करता रहा।
रेलवे मंत्रालय ने माल गाडिय़ों के संचालन के लिए दादरी से रेवाड़ी, अहमदाबाद, मुंबई तक रेलवे फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के लिए फरीदाबाद जिले के 20 गांवों की 556 एकड़ भूमि अधिग्रहण की है।
परियोजना के लिए जिन किसानों की भूमि अधिग्रहण की गई है, उन्हें जमीन का मुआवजा भी दिया जा चुका है। परियोजना के लिए हिंडन नदी, यमुना और रेलवे ट्रैक पर पुल बनाने के काम शुरू हो चुका हैं। इसके साथ ही टेंडर छोड़े जा चुके हैं।
साथ ही परियोजना के निर्माण कार्य शुरू करने को लेकर मंत्रालय ने एलएंडटी कंपनी के नाम टेंडर छोड़ दिया है। कंपनी अब अधिग्रहण की गई जमीन पर कब्जा लेना चाहती है। लेकिन, किसानों की ना-नुकर से परियोजना खटाई में पड़ गई है। सनद रहे बाजार भाव की मांग को लेकर सोमवार को किसान संघर्ष समिति ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा था।
बेनतीजा रही बैठक
बृहस्पतिवार को दोपहर करीब दो बजे मुआवजे को लेकर रेलवे और किसानों की बीच जिला प्रशासन की मध्यस्ता में बैठक हुई। जिला उपायुक्त की अनुपस्थिति में बैठक में जिला राजस्व अधिकारी राजेंद्र गहलौत और रेलवे फ्रेट कॉरिडोर परियोजना (नोएडा) के उप महाप्रबंधक विकास सिंघल मौजूद थे।
बैठक में किसानों ने मुआवजे की राशि बाजार भाव के मुताबिक देने की मांग की। जिसपर रेलवे अधिकारियों ने टालमटोल की नीति अपनाई। बैठक में किसानों ने पूर्व घोषणा के मुताबिक जमीन अधिग्रहण से प्रभावित परिवार में से एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 327 रुपये के हिसाब से मजदूरी देने की मांग की। करीब दो घंटे चली बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई।
कब्जा नहीं देंगे
किसानों ने मुआवजा बढ़ाने की अपील रोहतक मंडलायुक्त को दी थी। जिसपर अभी निर्णय नहीं आया है। उस निर्णय से पहले हम अपनी जमीन पर कब्जा नहीं लेने देंगे। रेलवे जमीन को कोडिय़ों के भाव लेना चाहता है, जो बर्दाश्त नहीं है। -अमरचंद चंदीला, अध्यक्ष किसान संघर्ष समिति
मांगों पर किया जाएगा विचार
बैठक विफल नहीं हुई है। किसानों ने अपनी कुछ मांग रखी हैं, जिसपर विचार किया जा रहा है। जल्द ही हम जमीन पर कब्जा लेना शुरू कर देंगे।
-विकास सिंघल, उप महाप्रबंधसक, डीएफसीसीआई