दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने रखे विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ किया गया। सेमिनार का विषय आत्मनिर्भर भारत के लिए स्मार्ट एवं सस्टेनेबल कृषि: प्रौद्योगिकियां, नीतियां एवं प्रथाएं रखा गया।
कार्यक्रम में देशभर से वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर कृषि के भविष्य पर मंथन किया। डीन इंस्टीट्यूशन एवं विभागाध्यक्ष प्रो. मुनिश वशिष्ठ ने कहा कि कृषि राष्ट्र की रीढ़ है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आईओटी व नवीकरणीय ऊर्जा जैसी उभरती तकनीकों को पारंपरिक खेती के साथ जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने शोध और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की दूरी कम करने पर जोर दिया।
सेमिनार संयोजक डॉ. मंजू कुमारी ने थीम प्रस्तुत करते हुए जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और मिट्टी की गिरती गुणवत्ता जैसी चुनौतियों के समाधान को लिए बहु-विषयक सहयोग की आवश्यकता बताई। मुख्य अतिथि डॉ. बाबन कुमार बंसोड़ ने कहा कि भारतीय कृषि में उत्पादन क्षमता तो है, लेकिन डेटा-आधारित निर्णयों की कमी से दक्षता प्रभावित होती है। उन्होंने सेंसर आधारित तकनीकों और व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर बल दिया।
कार्यक्रम में डीन अकादमिक प्रो. अतुल मिश्रा, डीएसडब्ल्यू प्रो. प्रदीप डिमरी सहित कई वरिष्ठ संकाय सदस्य उपस्थित रहे। अंत में डॉ. ललित राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सेमिनार के तहत अगले दो दिनों तक तकनीकी सत्र, शोध पत्र प्रस्तुतियां और विचार-विमर्श आयोजित होंगे।