फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में अवैध रूप से बसे गांव खोरी को खाली करवाने के लिए प्रशासन कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। वहीं अब स्थानीय लोग खासतौर पर महिलाएं प्रशासन से आमना-सामना करने का मन बना चुकी हैं। सभी का कहना है कि अपना आशियाना किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं देंगे। इसको बचाने के लिए अगर मरना पड़ा तो उसके लिए भी तैयार हैं। कार्रवाई के दिन वे गांव नहीं छोड़ेंगी चाहे तो बुलडोजर चढ़ा दें।
प्रशासन को चेतावनी देते हुए उन अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने कॉलोनी बसाने के समय किसी भी व्यक्ति को नहीं रोका। उन्होंने निवासियों की जमीन के कागजात तक बनवा दिए। उन्होंने कहा कि उस वक्त प्रशासनिक अधिकारी कहां थे। जब इस कॉलोनी को काटा गया। मकानों के निर्माण करवाए गए। शनिवार को दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने भी गांव की सीमा से लगते दिल्ली की सीमा की पैमाइश की। जिससे यह पता लगाया जा सके कि दिल्ली की सीमा कितनी है। शनिवार को अमर उजाला की टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की। लोगों का एक ही जवाब था कि वे अपने घरों को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। महिलाओं कहना है कि तोड़फोड़ होगी तो बच्चों के साथ घर में रहेंगे, फिर चाहे प्रशासन बुलडोजर ही क्यों न चढ़ा दे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से है हलचल
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और हरियाणा की सीमा पर वन क्षेत्र में अवैध रूप से बसाए गए खोरी गांव में बने करीब दस हजार मकानों को तोड़ने के आदेश सात जून को जारी किए थे। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार खोरी गांव में 125 एकड़ जमीन है। जिसमें से 80 एकड़ जमीन पर कब्जा किया हुआ है। तोड़फोड़ से पहले खोरी गांव के लोगों में काफी डर का माहौल है। हालांकि इससे पहले भी हाईकोर्ट के आदेश पर गांव में तोड़फोड़ की गई थी, लेकिन लोगों के पास सुप्रीम कोर्ट के विकल्प था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी जंगल की जमीन को खाली करने के आदेश दिए हैं। नगर निगम को कार्रवाई अमल में लानी है। नगर निगम व प्रशासन लोगों को खुद घर खाली करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसके लिए मुनादी का सहारा लिया जा रहा है, तो रणनीति भी लगातार बदली जा रही है। प्रशासनिक पहल पर लोगों को बुनियादी सुविधाएं कम से कम कर दी गई हैं। यहां बिजली-पानी व यातायात के साधनों के लिए लोग तरस रहे हैं। गांव में सुविधाएं पहले ही सीमित थी। अब बिजली के कनेक्शन काट दिए गए हैं। लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। मोबाइल नेटवर्क ठप पड़ गया है।
वैकल्पिक व्यवस्था करे सरकार
गांव के लोगों का कहना है कि सरकार तोड़फोड़ से पहले उनके लिए वैकल्पिक जगह की व्यवस्था करे। इसके साथ ही महिलाओं ने तोड़फोड़ को रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब गांव बस रहा था, उसी समय रोकना चाहिए था। कोरोना के कारण एक साल से खाली बैठे हैं। मजदूरी मिल नहीं रही है। कामकाज ठप है। ऐसे में लोन पर पैसा लेकर बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं। दुकानों पर उधार देना बंद कर दिया गया है। ऊपर से सरकार और प्रशासन उनके घरों को तोड़ रही है। ऐसे में वह किस तरह से जिएंगे।
राजस्व विभाग ने की पैमाइश
दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने बृहस्पतिवार को खोरी गांव के साथ लगती दिल्ली सीमा की पैमाइश की। इस दौरान तहसीलदार सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने बताया कि पैमाइश का उद्देश्य यह देखना है कि दिल्ली की सीमा कहां तक आती है। इसके दायरे में कितने घर आते हैं। बृहस्पतिवार को अधिकारियों ने फीता लेकर अपनी सीमा की जांच की।
वर्जन-
कर्ज लेकर जमीन खरीदी थी। परिवार में चार बेटियां है। उनकी पढ़ाई अभी बंद है। कोरोना के कारण पहले से परेशान थी। अब घर टूटने की वजह से तनाव है। कर्ज नहीं दे पाए और घर भी टूट जाएगा तो हम ऐसे ही मर जाएंगे। - आमना खातून, स्थानीय निवासी
प्रशासन हमें निकालने का पूरा प्रयास कर रहा है। इसलिए बिजली के कनेक्शन काट दिए। मोबाइल टावर बंद कर दिए। इन सबके बावजूद हम घरों में रहने के लिए तैयार है। तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई, तो उसका सामना करेंगे। - मीरा, स्थानीय निवासी
हम किसी भी कीमत पर घर खाली नहीं करेंगे। यदि सरकार हमारे घरों को खाली करवाना चाहती है तो उन्हें हम लोगों की लाशों से होकर गुजरना होगा। जेसीबी के आगे लेट जाएंगे, लेकिन घर छोड़कर नहीं जाएंगे। - शबनम, स्थानीय निवासी
पति की पांच साल पहले मौत हो गई है। परिवार में पांच बच्चे हैं। दो साल से घर बैठी हूं। अब घर टूटने के आदेश आ गए। आर्थिक तंगी के कारण घर पर खाना नहीं बना है। बच्चे भूख से तड़प रहे है। इधर-उधर मांग कर जो मिलता है। उससे काम चलाती हूं। ऐसे में सरकार को हम पर दया करनी चाहिए। - कल्पना देवी, स्थानीय निवासी