बल्लभगढ़। किसान आंदोलन को लेकर चंडीगढ़ रूट की ओर जाने वाले यात्री लगातार परेशानी उठा रहे हैं। बल्लभगढ़ बस स्टैंड पर रविवार को लगातार चौथे दिन भी यात्रियों को लौटना पड़ा। कई यात्री लगातार चार दिन से बस स्टैंड के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा कि आखिर बस चलेंगी कब। वहीं, छोटे रूट की बसों में यात्री मारामारी पर आमादा हैं।
रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि बसों का संचालन ठप होने से प्रतिदिन दो से तीन लाख रुपये का नुकसान हो रहा हैं। इन रूटों पर चलने वाली एक बस की अमूमन आमदनी करीब 35 हजार रुपये है। इन दिनों इस रूट पर 12 बसें नहीं चलाई जा रही हैं।
मैं यहां चंडीगढ़ जाने के लिए आया हूं। एक क्लाइंट के केस (जमीन) को लेकर सीनियर वकील से चर्चा करने के लिए जाना है, लेकिन बस न चलने के कारण समस्या आ रही है, क्योंकि बस से एक ही दिन में कार्य समाप्त कर उसी दिन वापसी हो जाती है।
- कवरपाल, एडवोकेट-तिगांव रोड बल्लभगढ़
अधिकतर एडवोकेट सोमवार को बल्लभगढ़ से चंडीगढ़ का सफर करते हैं, मुझे एक केस (जीएसटी) के सिलसिले में पंचकुला जाना है। इसी कारण बस के समय के बारे में मालूम करने के लिए आया हूं, लेकिन यहां आकर पता लगा कि फिलहाल पिछले तीन से चंडीगढ़ जाने के लिए कोई बस नहीं है।
- मुकेश सिंगला, एडवोकेट-एनआईटी पांच नंबर
मैं कल भी यहां बस के बारे में मालूम करने के लिए आया था। लेकिन मुझे यहां संतोषजनक जवाब नहीं मिला कि अंबाला के लिए बसें कब से शुरू होंगी। मुझे सोमवार को अंबाला में रिश्तेदार की शादी में शामिल होना है।
- प्रदीप गुप्ता, बल्लभगढ़
मैं यहां अपने परिवार के साथ यमुनानगर शादी में जाने के लिए आया हूं। करीब एक घंटे से इधर-उधर घूम रहा हूं। पूछताछ केंद्र पर भेज दिया गया। वहां बताया गया कि आगे वाले बताएंगे लेकिन अभी तक यह नहीं पता चला है कि बस कब चलेगी।
- देव मित्तल, चावला कॉलोनी बल्लभगढ़
लोकल रूटों पर है मारामारी
कोविड -19 काल में बहुत लंबे रूट की बस सेवा फिलहाल बंद है, वहीं छोटे रूट की बसों में संक्रमण को खुला न्यौता है। लोग इन बसों में सवार होने के लिए मारामारी पर आमादा हैं। यहां लोग बसों मेें सीट पाने की होड़ में खिड़कियों से स्वयं चढ़ रहे हैं। बच्चों को भी खिड़की से ही चढ़ा रहे हैं। बसों के दरवाजों पर जबरदस्त भीड़भाड़ है।
किसान आंदोलन के बाद चल सकती है बस
चंडीगढ़ रूट पर बसों के नहीं चलने से जहां यात्री परेशान है वहीं रोडवेज को भी भारी नुकसान से गुजरना पड़ रहा है। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार बसों के बंद होने से एक दिन का करीब दो से तीन लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं अन्य छोटे रूटों पर बसें चलाई जा रही हैं। अनुमान है कि बसों को किसान आंदोलन की शांति के बाद चलाया जाएगा।
- ओमी अधाना, ड्यूटी अधिकारी रोडवेज