वन विभाग और प्रशासन को उम्मीद, तालाबों के पुनर्जीवन से प्रवासी पक्षियों की संख्या के साथ उनकी प्रजनन क्षमता में भी सुधार होगा
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। अरावली की पहाड़ियों, प्राकृतिक जल स्रोतों और हरित क्षेत्रों के लिए पहचाने जाने वाले फरीदाबाद में एक बार फिर प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट बढ़ाने की तैयारी है। पिछले कुछ वर्षों में सूखते छोटे तालाब, घटते वन क्षेत्र और बढ़ते शहरीकरण के कारण जिन विदेशी पक्षियों की मौजूदगी कम होने लगी थी अब उनके लिए नए और पुराने जल स्रोतों को दोबारा विकसित किया जा रहा है। वन विभाग और प्रशासन को उम्मीद है कि तालाबों के पुनर्जीवन, ग्रीन बेल्ट बढ़ाने और वन क्षेत्र मजबूत करने से आने वाले वर्षों में प्रवासी पक्षियों की संख्या के साथ उनकी प्रजनन क्षमता में भी सुधार होगा।
हर साल अक्टूबर-नवंबर में यूरोप, साइबेरिया, मंगोलिया और मध्य एशिया के बर्फीले इलाकों से हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर प्रवासी पक्षी फरीदाबाद पहुंचते हैं। बार-हेडेड गीज, रूडी शेलडक (सुर्खाब), नॉर्दर्न पिनटेल, गार्गनी, कॉमन पोचार्ड और यूरेशियन कूट जैसी प्रजातियां यहां चार से पांच महीने तक रुकती हैं। मार्च के अंत में तापमान बढ़ने के साथ ये पक्षी वापस अपने प्रजनन स्थलों की ओर लौट जाते हैं।
स्थानीय पर्यावरणविदों के अनुसार बड़खल झील, सूरजकुंड क्षेत्र, अरावली की घाटियां, मांगर बनी, नहर पार क्षेत्र, नजफगढ़ झील से सटे इलाके और फरीदाबाद-जेवर रोड के आसपास जलभराव वाले खेत प्रवासी पक्षियों के प्रमुख ठिकाने रहे हैं। अरावली के वन क्षेत्रों में कई शिकारी प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी भी दर्ज की जाती रही है।
पानी, हरियाली और शांत वातावरण पक्षियों की पहली पसंद
विशेषज्ञों के अनुसार प्रवासी पक्षियों को केवल पानी ही नहीं बल्कि घने पेड़, दलदली क्षेत्र, प्राकृतिक हरियाली और शांत वातावरण भी बेहद पसंद होता है। जल पक्षी छोटे तालाबों, झीलों और दलदली क्षेत्रों में रुकना पसंद करते हैं जबकि पेड़ों पर रहने वाले और शिकारी पक्षी अरावली के वन क्षेत्रों और ग्रीन बेल्ट में बसेरा बनाते हैं। इन पक्षियों का मुख्य भोजन छोटी मछलियां, जलीय कीड़े, घोंघे, जलीय पौधे, खेतों में गिरा अनाज और हरी घास होती है। यदि जल स्रोतों में पानी बना रहता है तो वहां भोजन की उपलब्धता भी बेहतर रहती है, जिससे पक्षी अधिक समय तक क्षेत्र में रुकते हैं।
चार नए पक्के तालाब बनेंगे, पुराने जल स्रोत होंगे जीवित
अब वन विभाग ने अरावली क्षेत्र में जल संरक्षण की दोहरी योजना शुरू की है। कैम्पा योजना के तहत वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में चार नए पक्के तालाब बनाए जाएंगे। इन तालाबों का उद्देश्य गर्मियों में वन्यजीवों और पक्षियों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही फरीदाबाद–गुरुग्राम रोड और अरावली क्षेत्र के पुराने कच्चे तालाबों का पुनरुद्धार किया जाएगा। इनमें सिल्ट सफाई, खुदाई और तटबंध मजबूत करने जैसे कार्य होंगे ताकि बरसाती पानी लंबे समय तक संरक्षित रह सके। वन विभाग छोटे जल स्रोतों को भी सक्रिय रखने की योजना पर काम कर रहा है क्योंकि कई प्रवासी पक्षी बड़े जलाशयों की तुलना में शांत छोटे तालाबों को अधिक पसंद करते हैं।
प्रवासी पक्षी यूरोप से भारत आते हैं वहां अधिक बर्फ होने के कराण उन्हें भोजन नहीं मिल पाता है इसलिए वे सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करके यहां आते हैं। कई पक्षी पानी में रहने वाले होते हैं उनके लिए तालाब बहुत जरूरी हैं।- पंकज गुप्ता, पक्षी विशेषज्ञ