निर्माण के दौरान धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव करना है जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन शहर में निर्माण स्थलों पर अभी से धूल उड़ रही है। निर्माण कार्य के दौरान धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का नियमित छिड़काव करने का प्रावधान है। इसके बावजूद कई निर्माण स्थलों पर इसका पालन होता नजर नहीं आ रहा है। निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल आसपास के क्षेत्रों में पहुंच रही है और इससे वायु प्रदूषण बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों के दौरान धूल को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इनके तहत निर्माण सामग्री को ढककर रखने, निर्माण स्थल पर धूल उड़ने से रोकने और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव करने जैसे उपाय किए जाने हैं। बड़े निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए एंटी-स्मॉग गन सहित अन्य उपाय करने का भी प्रावधान है।
शहर में इस समय विभिन्न स्थानों पर सड़क, भवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य विकास कार्यों से जुड़े निर्माण चल रहे हैं। इन स्थानों पर निर्माण सामग्री और मिट्टी खुले में पड़े होने के कारण वाहनों के आवागमन के दौरान भी धूल उड़ती है। यदि समय रहते इन स्थानों पर पानी का छिड़काव और अन्य जरूरी उपाय नहीं किए गए तो ग्रेप लागू होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण के लिए अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
अक्सर देखने में आता है कि ग्रेप लागू होने के बाद ही निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को लेकर प्रशासन सख्ती शुरू करता है। इससे पहले निर्माण स्थलों की नियमित निगरानी और मानकों के पालन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में निर्माण कार्य जारी रहने के दौरान लगातार धूल उड़ती रहती है। यही धूल हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हो सकती है।
-
प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर ही कार्रवाई
प्रशासन की ओर से शहर में चल रहे निर्माण स्थलों का निरीक्षण प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर ही किया जाता है। इस दौरान देखा जाता है कि निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं या नहीं। पानी के छिड़काव के अलावा निर्माण सामग्री को ढककर रखने, मलबे को खुले में न रखने और बड़े निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपकरणों की उपलब्धता है या नहीं। कई बार केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग क़ी टीम भी जांच करने के लिए मौका मुआयना करती है।
प्रदूषण बढ़ने के बाद नियंत्रण के उपाय करने के बजाय पहले से ही धूल के स्रोतों को नियंत्रित करना अधिक प्रभावी होता है। इसलिए ग्रेप लागू होने का इंतजार करने के बजाय निर्माण स्थलों पर अभी से निर्धारित मानकों का पालन कराया जाना जरूरी है।
कैलाश शर्मा, सेक्टर -10
समय रहते पानी के छिड़काव और अन्य उपाय शुरू होने से निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। प्रशासन को समय रहते तय मानकों का पालन करवाना चाहिए।
महावीर बिश्नोई, सेक्टर -18