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Faridabad News: दिल्ली मॉडल पर कचरे से बनेगी बिजली, 20 एकड़ में लगेगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट

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रोजाना निकलने वाले कचरे के निस्तारण की तैयारी, पंचायत विभाग की जमीन पर स्थान चयन प्रक्रिया जारी
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में लगातार बढ़ रहे कचरे के संकट को दूर करने के लिए अब बड़े स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। शहर में जल्द ही 20 एकड़ जमीन पर वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। इस परियोजना के तहत शहर से प्रतिदिन निकलने वाले ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर उससे बिजली तैयार की जाएगी। यह परियोजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित की जाएगी और इसे फरीदाबाद के लिए कचरा प्रबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

फरीदाबाद नगर निगम क्षेत्र से वर्तमान में प्रतिदिन करीब 850 से 900 मीट्रिक टन कचरा निकल रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और व्यावसायिक विस्तार के कारण हर साल कचरे की मात्रा बढ़ रही है। अभी शहर का अधिकांश कचरा डंपिंग साइटों और बंधवाड़ी लैंडफिल तक पहुंचाया जाता है जहां लंबे समय से प्रदूषण, दुर्गंध और आग लगने जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को शहर के लिए दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
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जमीन तय होने के बाद परियोजना को गति मिलेगी

जानकारी के अनुसार इस परियोजना के लिए करीब 20 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। इसके लिए पंचायत विभाग की जमीन पर स्थान चयन की प्रक्रिया चल रही है। प्रशासनिक स्तर पर कई स्थानों का परीक्षण किया जा रहा है और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जमीन तय होने के बाद परियोजना को गति मिलेगी और टेंडर प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।

25 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य

अधिकारियों के अनुसार परियोजना से करीब 25 मेगावाट तक बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। तैयार होने वाली बिजली को सीधे ग्रिड में भेजा जाएगा। हालांकि कचरे से बिजली उत्पादन की लागत सामान्य बिजली की तुलना में अधिक मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार इसकी उत्पादन लागत करीब 10 रुपये प्रति यूनिट होगी जबकि बिजली की बिक्री दर लगभग 7 रुपये प्रति यूनिट रहने की संभावना है। दोनों के बीच आने वाले अंतर की भरपाई सरकार सब्सिडी के माध्यम से कर सकती है ताकि परियोजना आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनी रहे।
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300 से 400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान

परियोजना पर करीब 300 से 400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अगले माह तक कंसल्टेंट द्वारा रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरपीएफ) तैयार किए जाने की संभावना है। इसके बाद निजी कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक परियोजना को पूरी तरह चालू होने में करीब तीन वर्ष का समय लग सकता है।




यह प्लांट 20 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। अभी जमीन चयन का काम चल रहा है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
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