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टीकाकरण के इंतजार में ट्रायल में शामिल हुए वॉलंटियर

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फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कोवाक्सिन ट्रायल में भाग लेने वाले वॉलंटियर (स्वयंसेवी) आज तक टीकाकरण के इंतजार में हैं। तीसरे चरण के ट्रायल में पूरे देश में ऐसे 25,800 लोग हैं। यह सभी ट्रायल में प्रतिभागी बने। इसमें करीब 2400 लोगों की उम्र 60 वर्ष से अधिक रही। वहीं, करीब 4500 लोग किसी ने किसी दीर्घकालीन बीमारी से पीड़ित थे। फरीदाबाद के 1200 लोगों ने इस ट्रायल में हिस्सा लिया। ट्रायल में उन्हें रियल वैक्सीन लगी या प्रायोगिक दवा (जिसे मेडिकल भाषा में प्लेसिबो कहते हैं) यह जानकारी नहीं मिली है। यह जानकारी मिलने के बाद ही यह लोग टीकाकरण का लाभ ले सकेंगे। जिसे टीका लगा उसे सर्टिफिकेट जारी कर दूसरी डोज दी जाएगी, जिसे प्लेसिबो लगा वह टीकाकरण प्राथमिकता में शामिल होगा। हालांकि जानकारी के अभाव में यह लोग टीकाकरण से वंचित हैं।
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भारत भायोटेक-आईसीएमआर को लिखा, ट्रायल में शामिल होकर बन गए मूर्ख
प्लाज्मा दाताओं के जिला समन्वयक उमेश अरोड़ा ने भारत बायोटेक और आईसीएमआर को ई-मेल लिखकर फूल (मूर्ख) बनाने की शिकायत की है। वह खुद को व अन्य ट्रायल प्रतिभागियों को ठगा महसूस करने की शिकायत दोनों संस्थाओं से कर चुके हैं। इसका जवाब भी उन्हें ई-मेल से मिला है। उमेश ने लिखा कि वह कोवाक्सिन के तीसरे चरण के ट्रायल में शामिल हुए। वैक्सीन ट्रायल सफल होेने के बाद भी आज तक उनको व अन्य लोगों को इसकी जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें वास्तविक वैक्सीन लगी या फिर प्लेसबो। उमेश ने बताया कि ट्रायल एग्रीमेंट में उन्हें आश्वस्त किया गया था कि वैक्सीन सफल होते ही यह जानकारी साझा कर ली जाएगी। उमेश का आरोप है कि आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने वैक्सीन बनाकर सरकार को दी, वैक्सीन का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया। बावजूद इसके ट्रायल में शामिल लोगों के साथ जानकारी साझा नहीं की। ऐसे में वह लोग जो 45 से अधिक या 60 का आंकड़ा पार कर वैक्सीन के न केवल योग्य हैं बल्कि पहले हकदार भी, उनकी जान को जोखिम में डाला जा रहा है।
लोगों को प्रेरित कर ट्रायल में शामिल करने में रही भूमिका
उमेश बताते हैं कि वह कोविड मॉनिटरिंग जिला टीम के सदस्य हैं। उन्होंने लोगों की जान बचाने के लिए बनाई जा रही वैक्सीन के ट्रायल में भागीदारी के लिए स्थानीय स्तर पर 138 लोगों को प्रेरित किया था। सभी ट्रायल में शामिल हुए। अब वह लोग उनसे पूछते हैं कि वैक्सीन कब लगवा सकते हैं, उन्हें ट्रायल में वैक्सीन लगी या प्लेसिबो, यह कब पता लगेगा। उमेश इस बात का जवाब देने में खुद को असहाय समझ रहे हैं। उधर शिकायत करने पर ई-मेल का जवाब आया है इसमें जल्द ही जानकारी को साझा किया जाएगा।
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लोगों को इस सप्ताह देंगे जानकारी
देरी नहीं हुई है। यह साइंटिफिक प्रोसेस है। भारत बायोटेक या आईसीएमआर इसके लिए उत्तरदायी नहीं हैं। ड्रग कंट्रोलर जरनल ऑफ इंडिया को इसका अधिकारी है। वार्ता जारी है। हमें मिली जानकारी के अनुसार इस सप्ताह ही ट्रायल में शामिल हुए लोगों को बता दिया जाएगा कि वैक्सीन की डोज मिली है या प्लेसिबो। ईएसआईसी की ओर से इन सभी लोगों को फोन व मैसेज के जरिये जानकारी दी जाएगी। जिनको वैक्सीन लगी उन्हें प्रमाण पत्र मिलेगा। अन्य का वैक्सीनेशन किया जाएगा।
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- डॉ. एके पांडेय, रजिस्ट्रार, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज
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