डेंगू का एक नया मामला सामने आया
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। स्मार्ट सिटी में जहां एक और डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं, दूसरी और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। वायरल बुखार के मरीजों की संख्या सरकारी अस्पताल के साथ निजी अस्पताल में भी बढ़ रही है। बुधवार को जिले में एक और डेंगू के मरीज की पुष्टि हुई है। अब यह संख्या बढ़कर 16 पहुंच गई है।
डेंगू व मलेरिया विभाग के इंस्पेक्टर प्रीतम ने बताया कि मंगलवार को जिले में तीन नए डेंगू के मरीजों की पुष्टि हुई थी। वहीं, बुधवार को एक नए मरीज की पुष्टि और हुई है। उन्होंने बताया कि बरसात के बाद से डेंगू के मरीजों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है। इसलिए उनकी टीम द्वारा डेंगू बचाव के लिए संक्रमित के घरों और विभागों को नोटिस जारी कर रही है। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए पंपलेट भी बांटे जा रहे हैं। वहीं, दो मलेरिया के मरीज पाए गए हैं। जिनमें से तीन मरीजों को प्लेटलेट की जरूरत पड़ी थी।
वायरल के भी बढ़े मरीज
मंगलवार को हुई बरसात के बाद से ही बीके अस्पतालों में वायरल मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो गया है। वहीं निजी अस्पताल में हर रोज 20 से 30 वायरल के मरीज आते थे जो कि अब 50 तक पहुंच गए हैं। बीके अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ विकास गोयल ने बताया कि बरसात के बाद 12 साल से कम उम्र वाले बच्चे वायरल की चपेट में आसानी से आ जाते हैं। इसलिए बरसात के दिनों में बच्चों को कूलर व एसी में नहीं सुलाना चाहिए। इसके अलावा अगर किसी बच्चे को बुखार हो भी जाता है तो तुरंत डॉक्टर से उपचार लिया जाए। उनकी ओपीडी में बुधवार को 70 मरीज वायरल के आए, जिसमें सभी छोटे बच्चे थे।
हर वायरल डेंगू नहीं होता
सीएमओ डॉ. विनय गुप्ता का कहना है कि इन दिनों वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इसका यह मतलब नहीं है कि डेंगू है। डेंगू की पुष्टि जांच के बाद ही होती है। इसके अलावा बीके अस्पताल में प्लेटलेट फ्री में किया जाता है। डेंगू के मरीजों के लिए 16 बेड का वार्ड बनाया हुआ है। अगर मरीजों की संख्या में इजाफा होता है तो 100 बेड के बने अस्थाई कोरोना अस्पताल को डेंगू अस्पताल बना दिया जाएगा।
डेंगू से बचाव जरूरी, रखें ध्यान
-साफ पानी में पनपने वाला डेंगू का लार्वा एक सप्ताह में ही मच्छर बन जाता है। पानी का ज्यादा दिन तक भंडारण न करें
-डेंगू का खतरा बाहर नहीं घरों में ही है। घरों में काटने वाले मादा मच्छर ही डेंगू वाहक होते हैं। डेंगू से बचाव के लिए सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
-पहले से डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज रह चुके लोगों को बुखार आने पर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।