फरीदाबाद। साल 2018 में हुए बीकॉम की छात्रा निकिता तोमर के अपहरण मामले में तौसीफ के परिजनों पर मामला चलाया जाए या नहीं इसका फैसला 22 जुलाई को होगा। सोमवार को करीब 25 मिनट की बहस के बाद अदालत ने अगली तारीख दी है।
सोमवार को न्यायाधीश राजेश गर्ग की अदालत में आरोपी तौसीफ, उसके पिता जाक़र हुसैन, मां असमीना व चाचा जावेद खान पेश हुए। अभियोजन पक्ष की तरफ से निकिता के मामा व अधिवक्ता एदल सिंह रावत और बचाव पक्ष की तरफ से अधिवक्ता अनीस खान पेश हुए। करीब 25 मिनट तक चली बहस के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि साल 2018 में निकिता व उसके पिता मूलचंद तोमर ने अदालत में हलफनामा दायर कर कहा था कि उन्होंने गलतफहमी में तौसीफ का नाम लिखवा दिया था।
उस समय दी गई शिकायत में भी तौसीफ के पिता या किसी अन्य परिजन का नाम नहीं था। बचाव पक्ष का कहना था कि पीड़ित पक्ष हत्या मामले को मजबूती देने के लिए केस को बढ़ा रहा है। अभियोजन पक्ष का कहना था कि उस समय सामाजिक व आधिकारिक दबाव के चलते केस को वापस ले लिया गया था। हत्या के बाद केस की दोबारा से जांच के बाद एसआईटी ने तौसीफ के पिता, मां व चाचा को आरोपी बनाया है। अदालत ने बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब 22 जुलाई को तय होगा कि इस मामले को खारिज किया जाए या आरोपियों पर आरोप तय करते हुए केस का ट्रायल शुरू हो।