दुकान से सामान दिलाकर मजदूरी करने चले गए थे पिता
समयपुर निवासी राजकुमार ने बताया कि उनके तीन बच्चे थे। एक पांच साल का बेटा, दूसरा दो साल का प्रिंस और एक चार महीने की बेटी। सोमवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे वह दोनों बेटों को दुकान से खाने का सामान दिलाने के बाद मजदूरी करने के लिए चला गया। दोनों बच्चे घर के अंदर चले गए। वहीं उनका दो साल का बेटा प्रिंस अन्य बच्चों के साथ छत पर खेल रहा था। तभी खेलते हुए प्रिंस छत से नीचे गिर गया और वह बेहोश हो गया।
मकान मालिक ने दी सूचना
राजकुमार ने बताया कि उनके फोन पर साठ बजकर 50 मिनट पर मकान मालिक का फोन आया कि उनका बेटा गिर गया। जिसके बाद वह घर पर गए। जहां से वह अपने बेटे को तुरंत उपचार के लिए धौज स्थित अल-फलाह अस्पताल व मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। जहां इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद दिल्ली रेफर करने की बात कही। जिसके बाद उस बच्चे को बीके अस्पताल रेफर कर दिया।
साढ़े 11 बजे लेकर आया बीके अस्पताल
राजकुमार ने बताया कि वह अपने बच्चे को मेडिकल कॉलेज से करीब साढ़े 11 बजे बीके अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर आए। जहां उसको उपचार देने के बाद दिल्ली रेफर कर दिया। दिल्ली के लिए वह करीब साढ़े 12 बजे एंबुलेस लेने के लिए पहुंचे। जहां एंबुलेस के कर्मचारियों ने बताया कि वह एक बार बच्चे को दोबारा से इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर से चेक करवाए। जिसके बाद वह दोबारा से इमरजेंसी में गए जहां एक बजकर 25 मिनट पर डॉक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। उनके पिता राजकुमार का आरोप है कि हादसे के बाद वे बच्चे को बचाने के लिए लगातार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाते रहे। उनका कहना है कि यदि समय रहते बच्चे को उचित उपचार मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
मकान की छत पर नहीं लगी हुई है ग्रिल
राजकुमार ने बताया कि जिस मकान की पहली मंजिल पर वह रहते हैं उसकी छत पर सिर्फ तीन पिलर खड़े किए हुए हैं। उस पिलर के बीच में सुरक्षा के लिहाज से कोई पाइप व ग्रिल नहीं लगा हुआ है। अगर ग्रिल व अन्य कोई सुरक्षा होती तो शायद उनका बेटा गिरने से बच जाता। वहीं पीएमओ डॉ. विकास गोयल का कहना है कि प्रिंस की हालत कैसी थी इसके बारे में इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर बता पाएंगे।