फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डेथ वैली में दो की मौत: दिल्ली से आए थे छह दोस्त, कृत्रिम झील में लगाई डुबकी तो नहीं आए बाहर, ऐसे निकले शव

Sun, 18 Jun 2023 08:38 PM IST
Digvijay Singh संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद

सार

दिल्ली संगम विहार इलाके से छह दोस्त रविवार दोपहर में धौज इलाके के गांव सरोही में बनी कृत्रिम झील में नहाने आए थे। कई मौतों के कारण इस झील का नाम डेथ वैली भी पड गया है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली के संगम विहार इलाके से नहाने के लिए धौज इलाके में बनी कृत्रिम झील में नहाने आए दो युवकों की डूब जाने से मौत हो गई। दिल्ली से कुल छह दोस्त नहाने के लिए आए थे। चार पूरी तरह से सुरक्षित हैं। मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के लिए बीके अस्पताल भिजवाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक दिल्ली संगम विहार इलाके से छह दोस्त रविवार दोपहर में धौज इलाके के गांव सरोही में बनी कृत्रिम झील में नहाने आए थे। कई मौतों के कारण इस झील का नाम डेथ वैली भी पड गया है। पानी में नहाते समय नजीम (22) और गुड्डू उर्फ मधुकर (28) काफी देर तक पानी से बाहर नही आए। कई आवाज लगाने के बाद भी झील से कोई प्रतिक्रिया नही मिल रही थी। 


बाहर खडे रोहित, सागर, लक्षमण और सचिन ने शोर मचाना शुरू किया लेकिन कोई आसपास मौजूद नही था। दोस्तों में से एक ने पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पंहुची पुलिस व दमकल विभाग की टीम ने नजीम और गुड्डू के शव बाहर निकाले। फेफडों में पानी भर जाने के कारण दोनों की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव बीके अस्पताल में भिजवा दिए हैं। परिजनों को सूचना दे दी गई है। सोमवार को मृतकों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

 

खनन के बाद बन गई झील

डेथ वैली के नाम से मशहूर यह झील 7 खदानों का एक संग्रह है। स्थानीय लोग बताते हैं कि साल 1990 तक अरावली में खनन का कार्य धड़ल्ले से चला। वर्ष 1991 में खनन पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दी। फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड किनारे आधा दर्जन से अधिक खदानें भू जल को छू गई और यहां प्राकृतिक रूप से नीले रंग का साफ पानी निकल आया जो धीरे-धीरे झील में तब्दील हो गई।

विज्ञापन

कई लोगों की जिंदगी लील चुकी है झील

खनन के कारण झीलों की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल है। यहां की सुंदरता देख साल 1991 के बाद से दिल्ली समेत पूरे एनसीआर के लोग घूमने-फिरने आने लगे। जैसे- जैसे यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ी, वैसे ही दुर्घटनाओं का आंकड़ा भी बढ़ता चला गया। कभी कोई झील में नहाने के दौरान डूब जाता, तो कोई सेल्फी लेने के चक्कर में इसमें गिरकर अपनी जान गंवा बैठा। यहां पर तैरना प्रतिबंधित है और प्रशासन की तरफ से लगातार चेतावनी दी जाती रहती है। बावजूद इसके यहां आने वाले पर्यटक चेतावनी को न सिर्फ नजरअंदाज करते हैं, बल्कि तैरने के लिए झील में उतरकर अपनी जान गंवा बैठते हैं। गर्मियों के दौरान लोगों की अधिक भीड़ उमड़ती है। अक्सर हादसे में एक-दो की मौत हो जाती है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें