फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: डीजल जनरेटरों से फेफड़ों तक पहुंच रहा जहरीला प्रदूषण, रोजाना 93 किलो पीएम-2.5 हवा में घुल रहा

विज्ञापन
विज्ञापन
सोसाइटियों और उद्योगों के डीजल जनरेटर से जहरीली हो रही हवा, रोजाना 1558 किलो नाइट्रोजन ऑक्साइड का हो रहा उत्सर्जन
विज्ञापन




राहुल राज

फरीदाबाद। शहर की सोसाइटियों और औद्योगिक इकाइयों में चल रहे डीजल जनरेटर हवा में प्रदूषण घोल रहे हैं। जिले में जनरेटरों से रोजाना बड़ी मात्रा में हानिकारक गैसें और सूक्ष्म कण निकल रहे हैं। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डीजल जनरेटरों से होने वाला उत्सर्जन शहर की आबोहवा के लिए गंभीर खतरा है। टीईआरआई की रिपोर्ट के अनुसार, इन जनरेटरों से रोजाना 1558 किलोग्राम नाइट्रोजन ऑक्साइड समेत कई हानिकारक प्रदूषक उत्सर्जित हो रहे हैं।

टीईआरआई की रिपोर्ट के अनुसार जिले में डीजल जनरेटरों से हर दिन 109 किलोग्राम पीएम-10, 93 किलोग्राम पीएम-2.5, 102 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड, 1558 किलोग्राम नाइट्रोजन ऑक्साइड, 336 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड और 127 किलोग्राम गैर-मीथेन वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (एनएमवीओसी) उत्सर्जित हो रहे हैं। इन प्रदूषकों से हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। पीएम-2.5 के बारीक कण सांस के जरिये फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं। वहीं, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें भी स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं।
विज्ञापन


5 से 7250 केवीए क्षमता तक के जनरेटर चल रहे

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद में 5 से 7250 केवीए क्षमता तक के जनरेटर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र के आठ चुनिंदा ग्रिडों में किए गए प्राथमिक सर्वेक्षण के मुताबिक, ये औसतन रोजाना करीब ढाई घंटे चलते हैं। बड़े उद्योगों और सोसाइटियों में इनका इस्तेमाल जारी रहने से उत्सर्जन पर नियंत्रण बड़ी चुनौती बना हुआ है।

जिले में 20 हजार से अधिक डीजल जनरेटर संचलित

औद्योगिक नगरी में 20 हजार से अधिक डीजल जनरेटर चल रहे हैं। बिजली कटौती के दौरान उद्योगों से लेकर रिहायशी सोसाइटियों और सरकारी प्रतिष्ठानों तक में इनका इस्तेमाल किया जाता है। शहर में 30 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, इनमें से करीब 16 हजार इकाइयों में जनरेटर का उपयोग होता है। इसके अलावा जिले की करीब 100 रिहायशी सोसाइटियों में भी बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए डीजल जनरेटर लगे हैं। सरकारी भवनों के साथ रेनीवेल, ट्यूबवेल, बूस्टर और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के संचालन में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी संख्या में जनरेटरों के संचालन से इनके उत्सर्जन पर नियंत्रण करना चुनौती बना हुआ है।
विज्ञापन




पीएम-2.5 के बारीक कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से हृदय और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को प्रदूषण से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर एन-95 मास्क पहनें।
- डॉ. योगेश गुप्ता, जिला नागरिक अस्पताल



प्रदूषक का नाम
दैनिक उत्सर्जन

पीएम-10
109 किलोग्राम
पीएम-2.5 93 किलोग्राम
सल्फर डाइऑक्साइड 102 किलोग्राम
नाइट्रोजन ऑक्साइड 1,558 किलोग्राम
कार्बन मोनोऑक्साइड 336 किलोग्राम
गैर-मीथेन वाष्पशील कार्बनिक यौगिक 127 किलोग्राम

कुल

2,325 किलोग्राम










विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें