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Faridabad News: जिले में खतरनाक लावारिस कुत्तों को रखने के लिए नहीं है कोई स्थान

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हर चौराहे पर दिख जाता है लावारिस कुत्तों का झुंड, अभी तक 3200 कुत्तों की हुई नसबंदी
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में लावारिस कुत्तों को लेकर निगम लगातार अभियान चला रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर इसे तेज करने की जरूरत है। करीब 17 माह में 3200 लावारिस कुत्तों की नसबंदी की है। वहीं जिले में खतरनाक लावारिस कुत्तों को रखने के लिए कोई स्थान नहीं है।


आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए साफ कर दिया है कि लावारिस कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण किया जाएगा। इसके बाद उन्हें वापस उसी इलाके में छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आक्रामक और हिंसक कुत्तों को सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उनके लिए अलग व्यवस्था करनी होगी। यह फैसला दिल्ली नगर निगम से जुड़े एक मामले में आया है लेकिन इसे अन्य प्रदेशों को भी पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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फरीदाबाद में लावारिस कुत्तों की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2024 से अब तक करीब 3200 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। बावजूद इसके, शहर की सड़कों पर कुत्तों के झुंड आमतौर पर देखे जा सकते हैं। खासतौर पर रात के समय पैदल चलने वाले लोग, साइकिल सवार और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं। कई इलाकों से बच्चों पर हमले की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

फरीदाबाद में कुछ साल पहले डॉग शेल्टर जरूर बनाए गए थे लेकिन उनकी हालत आज खस्ताहाल है। वहां न तो पर्याप्त सफाई है और न ही किसी तरह की देखभाल। किसी में मलबा पड़ा हुआ है तो किसी में एंबुलेंस चालकों ने बैठने का अड्डा बना रखा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश ने निगम और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सवाल यह है कि जब शहर में पहले से बने शेल्टर ही बदहाल हैं तो आक्रामक और खतरनाक कुत्तों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था कैसे होगी।

बड़खल, एनआईटी, बल्लभगढ़ और ओल्ड फरीदाबाद जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में लोग रोजाना आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहे हैं। कई बार लोग शिकायत दर्ज कराते हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज कुछ दिनों के लिए कुत्तों को पकड़कर ले जाया जाता है। बाद में उन्हें फिर से वहीं छोड़ दिया जाता है।
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जानकारों का कहना है कि इस आदेश का सही क्रियान्वयन तभी होगा जब नगर निगम और प्रशासन मिलकर ठोस योजना बनाए। नसबंदी और टीकाकरण की गति को और तेज करना होगा। इसके साथ ही हिंसक कुत्तों के लिए अलग से सुरक्षित शेल्टर की व्यवस्था करनी होगी।
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