फरीदाबाद। छोटे एवं मझोले उद्योगों के सामने अब एक नई मुसीबत आ गई है। यह मुसीबत औद्योगिक इलाकों में होने वाली बिजली में कटौती है। मरम्मत कार्य के नाम पर रोजाना चार से पांच घंटे बिजली कटौती की जा रही है। इसके अलावा फॉल्ट और ब्रेकडाउन की समस्या अलग है। इससे उद्योग में उत्पादन क्षमता पर असर पड़ रहा है। हालांकि, दो साल पहले मुख्यमंत्री मनोहरलाल फरीदाबाद को 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बाद भी शहर का ये हाल है। ऐसे में नए उद्योग लगने के बजाय उद्यमी यहां से कारोबार बंद कर दूसरे राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं।
जिले में करीब 30 हजार उद्योग हैं। बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से आईपीडीएस योजना चलाई जा रही हैं। इसका कार्य अंतिम चरण में है। इसके बावजूद उद्योगों को बिजली कटौती से निजात नहीं मिल रही है। बिजली जाने पर उद्यमियों को जनरेटर चलाने पड़ते हैं। 15 अक्तूबर से ग्रेडेड रिस्पांस सिस्टम (ग्रेप) लागू होने के बाद जनरेटरों पर पाबंदी लगा दी जाएगी। ऐसे में उद्योगों पर दोहरी मार पड़नी तय मानी जा रही है। फरीदाबाद इंडस्ट्री एसोसिएशन (एफआईए) के पर्यावरण पैनल के चेयरमैन नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि हर साल गर्मी में बिजली कटौती से उद्योगों को परेशानी होती है। फरीदाबाद औद्योगिक इलाके में 4 से 5 घंटे बिजली कटौती हो रही है, जिसका उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
साल-दर-साल बढ़ रही है उद्योगों में बिजली की खपत
हर साल उद्योगों में बिजली की खपत बढ़ रही है, जबकि इसकी उपलब्धता में सुधार नहीं हो रहा है। इसलिए उद्योगों को बिजली कटौती की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रेप लागू करने से पहले सरकार को बिजली कटौती से निजात दिलानी चाहिए। लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। अगर उद्योगों को 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी तो वह जनरेटर नहीं चलाएंगे। बिजली विभाग की नाकामयाबी का खामियाजा उद्योगों को भुगतना पड़ता है। लघु उद्योग भारती के प्रधान रवि भूषण खत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में बिजली का बुरा हाल है। यहां रोजाना चार से पांच घंटे बिजली काटी जाती है। खासकर 11 से तीन बजे के बीच। यह समय एमएसएमई उद्योग में उत्पादन का व्यस्ततम समय होता है। ऐसे में बिजली न होने से उद्योग को परेशानी हो रही है।
वर्जन
शहर में बिजली व्यवस्था सुधार पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। आईपीडीएस योजना का काम अंतिम चरण में है। इसके बाद फॉल्ट और ब्रेक डाउन की समस्या खत्म हो जाएगी।
- नरेश कक्कड़, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम