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Faridabad News: जिले में 25 हजार ई-वाहन, पर सार्वजनिक स्थानों पर नहीं है चार्ज करने की सुविधा

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सब्सिडी और छूट के बाद भी ई-वाहन नीति को नहीं मिल पा रही सफलता
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में करीब 25 हजार इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। इसके बावजूद आम लोगों के लिए एक भी सरकारी सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं है। सरकार एक ओर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 1.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी, रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं दे रही है। दूसरी ओर चार्जिंग स्टेशन जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध न होने से ई-वाहन नीति का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

फरीदाबाद में हर साल बढ़ते वायु प्रदूषण और ईंधन खर्च को देखते हुए बड़ी संख्या लोग में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना चाहते हैँ, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग ई वाहन लेने से बच रहे हैँ। अधिकांश वाहन मालिक घरों, निजी सोसाइटियों या व्यावसायिक परिसरों में उपलब्ध सीमित चार्जिंग व्यवस्था पर निर्भर हैं। जिन लोगों के पास निजी पार्किंग नहीं है उनके लिए इलेक्ट्रिक वाहन चलाना आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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नीति बनी, लेकिन आधारभूत ढांचा नहीं

हरियाणा की ई-वाहन नीति वर्ष 2022 में लागू की गई थी। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को सब्सिडी के अलावा रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट दी जा रही है। कुछ श्रेणियों में टोल टैक्स में भी रियायत का प्रावधान है। इसके बावजूद फरीदाबाद में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। नीति में शॉपिंग मॉल, बड़े व्यावसायिक परिसरों और आवासीय सोसाइटियों में चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की बात कही गई थी लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह व्यवस्था अभी तक नहीं बन सकी है।
प्रदूषण को कम करने के लिए ई वाहन जरूरी
फरीदाबाद लंबे समय से खराब वायु गुणवत्ता के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। सर्दियों में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स अक्सर गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क परिवहन से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। ऐसे में यदि शहर में मजबूत चार्जिंग नेटवर्क विकसित हो और लोग बड़ी संख्या में पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं तो स्थानीय स्तर पर प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि सरकार की नीति और जमीनी तैयारियों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले लोग वाहन तो ले रहे हैं लेकिन चार्जिंग के लिए उन्हें निजी विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
कुछ सोसाइटियों में चार्जिंग की व्यवस्था
जिले में पंजीकृत वाहनों में लगभग छह हजार व्यावसायिक हैं। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थान पर सरकारी चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं हैं। निजी स्तर पर ग्रेटर फरीदाबाद की कुछ सोसाइटियों जैसे आरपीएस सवाना और सेक्टर-15 के कुछ परिसरों में चार्जिंग की व्यवस्था है लेकिन वहां भी सुविधा आम लोगों के लिए नहीं है, केवल परिसर के निवासियों तक सीमित है। यही वजह है कि टैक्सी, डिलीवरी, ई-रिक्शा और अन्य व्यावसायिक ईवी संचालकों को चार्जिंग के लिए अतिरिक्त समय और दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनकी परिचालन लागत और समय दोनों प्रभावित होते हैं।

इलेक्ट्रिक बसों की योजना भी धीमी

शहर में सार्वजनिक परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों की योजना भी लंबे समय से अधूरी है। सेक्टर-61 में इलेक्ट्रिक बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है लेकिन कार्य धीमी गति से चल रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद ही बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन संभव हो सकेगा। रोडवेज अधिकारियों का दावा है कि अगले एक वर्ष में यह काम पूरा हो जाएगा लेकिन फिलहाल इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा।
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नगर निगम शहर में लगाएगा 100 से अधिक चार्जिंग स्टेशन
इस समस्या के समाधान के लिए नगर निगम की तरफ से पूरे शहर में 100 से अधिक चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए एजेंसियों के साथ तालमेल बैठाकर आगे का रोडमैप तैयार हो रहा है। नगर निगम के कार्यकारी अभियंता नितिन कादियान के अनुसार शहर की आबादी को देखते हुए 100 से अधिक चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे इसके लिए निगम की तरफ से टेंडर लगाए जाएंगे। आने वाले माह में यह काम शुरू कर दिया जाएगा। वहीं कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल भी फरीदाबाद में चार्जिंग स्टेशन लगवाने की योजना को हरी झंडी दिखा चुके हैं।
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