फरीदाबाद। गांव खोरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की जा रही तोड़फोड़ कार्रवाई जारी है। इस दौरान तोड़फोड़ दस्ते ने भारी संख्या में मकान तोड़े गए। जीवन भर की पूंजी से बनाए मकानों को गिरता देखकर महिलाएं व बच्चे बेबस नजर आए। दो महिलाएं बेहोश हो गई। इनमें से एक को मौके पर अस्पताल ले जाना पड़ा। वहीं अपने घरों टूटता देख लोग रोते बिलखते नजर आए। ऐसे में अब लोगों को अपने घरों को बचने की कोई उम्मीद नहीं है।
कोर्ट के आदेश पर तोड़फोड़ कार्रवाई से बेघर हुए लोगों के सामने अब रोजी रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने अंतिम सप्ताह गांव खोरी में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की थी। रविवार को नगर निगम का तोड़फोड़ दस्ता भारी पुलिस बल के साथ गांव में पहुंचा। डरे सहमे लोग घरों में आराम से बैठे थे, आशियाना बचाने की सोच रहे थे। कहां किराए पर मकान लिया जाए। उसका खर्चा कहां से निकाला जाएगा। वह कुछ समझ पाते कि उससे पहले ही पुलिस ने घरों में डेरा डाल लिया।
लोगों के घरों से बाहर जाने पर रोक लगा दी। जिससे की लोग बाहर निकलकर हंगामा न कर सके। तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। रोते-बिलखते लोग बारिश में अपने सिर की छत उजड़ता देखकर बेसुध हो गए। लोगों ने कार्रवाई रोकने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों मिन्नतें कीं। लोग प्रशासन के सामने गिड़गिड़ाते रहे। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों की एक न सुनी। छलकते आंसू भी उनके आशियाने को नहीं बचा सके। इस दौरान कुछ लोग अपना सामान बचाते दिखे, तो कई लोगों के जरूरी सामान मलबे में दब गए। नगर निगम द्वारा राधा स्वामी आश्रम में खोरी से बेघर हुए लोगों के लिए शिविर लगाया गया है। यहां लोगों के भोजन और रुकने के लिए अस्थाई व्यवस्था की गई है। इसमें अब तक 264 लोग अब तक आवेदन कर चुके हैं। वहीं 294 लोगों को भोजन कराया जा चुका है।
खोरी गांव के लोगों को रोजी-रोटी का संकट
खोरी में रह रहे अनेक लोग ऐसे है जिनका कोरोना महामारी के बाद से काम धंधा चौपट पड़ा है। घर बचाने के चक्कर में कुछ लोग एक माह से नौकरी छोड़कर घर बैठे हैं। अब तोड़फोड़ कार्रवाई से उनके सिर की छत भी छिन गई। ऐसे में लोगों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में लोग अपने बच्चों को लेकर खोरी में अपनी जमीन पर तंबू लगाकर रहने को मजबूर हो गए है।
लोगों से बातचीत
मजदूरी कर के किसी तरह बच्चों का पेट भर रहे थे। वह काम भी कोरोना महामारी की वजह से काफी समय से बंद था। रहने के लिए एक छत थी। वह भी सरकार से छीन ली।, लेकिन हम अपनी जमीन छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। - रामनाथ, स्थानीय निवासी
घर टूटने के साथ ही खाने पीने की बड़ी समस्या हो गई है। पानी की सबसे ज्यादा समस्या है। प्रशासन द्वारा गांव में पानी भेजा जाता है। लेकिन जब तक टैंकर पर पहुंचते हैं। वह चला जाता है। भीषण गर्मी में पानी तक के लिए तरसना पड़ रहा है। - मनोज सिंह, स्थानीय निवासी
आश्रम में प्रशासन द्वारा सुविधाओं नाम की दी जा रही है। रुकने के लिए अंदर न ठीक से व्यवस्था है और न पंखे है। गर्मी में लोग परेशान है।
- आरजू खातून, स्थानीय निवासी
पुनर्वास योजना के तहत दिए जा रहे फ्लैट के आवेदन करनी आई हूं। सुरक्षा कर्मी ने फॉर्म नहीं भरे जाने की बात बोल कर वापस लौटा दिया। - रिजवाना बेगम, स्थानीय निवासी