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Faridabad News: अगले एक सप्ताह तक शुष्क रहेगा मौसम, किसानों को मिलेगा लाभ

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बारिश की संभावना कम, मगर बनी रहेगी ठंडक
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले के किसानों के लिए अगले एक सप्ताह का समय कृषि कार्यों की दृष्टि से अहम रहने वाला है। कृषि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, फरीदाबाद में 11 अक्तूबर से लेकर करीब 15 अक्तूबर तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क और साफ रहने की संभावना है। इस दौरान बारिश की कोई उम्मीद नहीं है, जिससे किसानों को खेतों में काम करने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे।

मौसम विभाग के मुताबिक दिन का अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से करीब आठ किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी और आर्द्रता लगभग 46 प्रतिशत तक रहने की संभावना है। मौसम साफ रहने से दिन में धूप खिली रहेगी इससे खेतों की नमी तेजी से कम होगी।
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दिन-तारीख
अधिकतम तापमान
न्यूनतम तापमान मौसम की स्थिति
11 अक्तूबर 29-
20 डिग्री सेल्सियस
धूप/साफ
12 अक्तूबर 30 -
19 डिग्री सेल्सियस
धूप/साफ
13 अक्तूबर 31 -
19 डिग्री सेल्सियस
धूप/साफ
14 अक्तूबर 31 -
19 डिग्री सेल्सियस
धूप/साफ
15 अक्तूबर 31
- 19 डिग्री सेल्सियस
धूप/साफ

किसानों के लिए सलाह
कृषि विशेषज्ञ डॉ. मनजीत ने बताया कि यह सप्ताह फरीदाबाद के किसानों के लिए फसल की देखभाल और नई बुवाई की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने जिले में मुख्य फसलों, कपास, सरसों और धान के लिए विशेष सुझाव दिए हैं।

कपास में हल्की सिंचाई की जरूरत


जिन किसानों की कपास के टिंडे पक चुके हैं, वे अब साफ-सुथरी चुनाई शुरू कर सकते हैं। कपास चुनते समय पत्तियां और धूल न मिलने दें ताकि मंडी में भाव अच्छा मिले। जहां टिंडे अभी पूरी तरह नहीं खुले हैं, वहां हल्की सिंचाई से नमी बनाए रखना उचित होगा। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसान कपास की चुनी गई खेप को सूखी और हवादार जगह पर रखें ताकि फफूंद या दाग न लगें।
सरसों की बुवाई का उपयुक्त समय
यह समय सरसों की बुवाई के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। जिन किसानों ने अब तक खेत तैयार नहीं किया है वे तुरंत जुताई और बुवाई की तैयारी करें। डॉ. मंजीत के अनुसार, तापमान का 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहना सरसों की पैदावार के लिए अच्छा है। प्रति हेक्टेयर 4-5 किलो बीज की दर से बुवाई करें और क्षेत्र की जलवायु के अनुसार उन्नत किस्में जैसे आरएच-1198, आरएच-1424, आरएच-1706 इस्तेमाल कर सकते हैं।
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धान का रखना होगा खास ध्यान
फरीदाबाद और बल्लभगढ़ क्षेत्रों में धान की फसल में इस समय झोंका रोग (ब्लास्ट) और तना छेदक (स्टेम बोरर) का खतरा बढ़ जाता है। अगर धान की बालियों पर आंख जैसी आकृति वाले भूरे या काले धब्बे दिखें तो यह झोंका रोग का संकेत है। रोकथाम के लिए ट्राइसाइक्लाजोल 75 प्रतिशत वीपी की 500 ग्राम दवा प्रति एकड़ पानी में घोलकर 2-3 बार छिड़काव करना ठीक रहेगा।
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