उत्तर प्रदेश के कलाकार गंगा के किराने तपस्या में लीन साधुओं के उकेर रहे दृश्य
प्रशांत दीक्षित
फरीदाबाद। अरावली की वादियों में सात से 23 फरवरी तक अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले का आयोजन होगा। इस बार मेले में प्रयागराज के महाकुंभ का नजारा पर्यटकों को देखने को मिलेगा। मेला क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने गंगा के किराने साधुओं को तपस्या में लीन दिखाने के दृश्य उकेरने का काम शुरू कर दिया।
38वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला बहुत ही विशेष होने वाला है। इस बार पर्यटकों को प्रयागराज के महाकुंभ से लेकर जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा के दर्शन मेला परिसर में होंगे। मेला क्षेत्र में वाराणसी के 84 घाट पहले से मौजूद हैं। उसके पास ही उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने प्रयागराज महाकुंभ के दृश्य बनाने शुरू कर दिए हैं। इनमें महाकुंभ क्षेत्र के गंगा तटों पर साधु तपस्या में लीन दिखाई देंगे। नागा साधु हाथ में अस्त्र लिए गंगा में आस्था की डुबकी लगा रहे होंगे। इस प्रकार के दृश्यों के साथ उत्तर प्रदेश के कलाकार प्रयागराज महाकुंभ क्षेत्र बनाएंगे। इससे मेले में आने वाले पर्यटक महाकुंभ के दर्शन कर सकेंगे।
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भारतीय ग्रामीण जीवन का होगा अनुभव
थीम स्टेट के ओडिशा के कलाकार मेला परिसर में तैयारियों में जुटे हैं। इस बार ओडिशा के 200 से अधिक कलाकार मेले में शामिल होंगे। जो मेला में कला और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। कलाकार ग्रामीण परिदृश्यों को दर्शाने वाली कलाकृतियां भी तैयार कर रहे हैं। ये कलाकृतियां मेले में आने वाले लोगों को भारतीय ग्रामीण जीवन का एक अलग ही अनुभव करवाएंगी। पर्यटकों को जगन्नाथ मंदिर और जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा के दर्शन भी सूरजकुंड मेले में होंगे।