रिकॉर्ड भीड़ से गुलजार हुआ सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प महोत्सव, नौ दिनों में पहुंचे 7.28 लाख पर्यटक
दूसरे वीकेंड पर छलका उत्साह, 3.20 लाख की भागीदारी से शिल्पियों-दुकानदारों के खिले चेहरे
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। दुनिया के सबसे बड़े शिल्प आयोजनों में शुमार 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव ने इस साल भी लोकप्रियता के नए मानक गढ़ने शुरू कर दिए हैं। दूसरे वीकेंड पर मेले में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ी और पूरे परिसर में दिनभर उत्सव जैसा माहौल दिखा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक नौ दिनों में 7 लाख 28 हजार पर्यटक मेले का दीदार कर चुके हैं जबकि दूसरे वीकेंड पर ही 3.20 लाख से अधिक लोगों ने भागीदारी की। बढ़ती भीड़ ने शिल्पियों, कारीगरों, बुनकरों और दुकानदारों के चेहरों पर नई चमक ला दी है।
रविवार को ही 2.20 लाख दर्शक, श्रद्धांजलि से हुई शुरुआत
विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि केवल रविवार को ही 2 लाख 20 हजार पर्यटक सूरजकुंड पहुंचे। कार्यक्रमों की शुरुआत से पहले मेला और जिला प्रशासन की ओर से दिवंगत इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया। उन्होंने बताया कि 38वें संस्करण में कुल 15 लाख से अधिक पर्यटक आए थे लेकिन इस बार सिर्फ नौ दिनों में ही आधी संख्या पार हो चुकी है। वैलेंटाइन सप्ताह को देखते हुए आने वाले दिनों में भीड़ और बढ़ने की संभावना है और यह संस्करण पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की भावना को मिल रहा मंच
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय एकता, कला और संस्कृति को मजबूत करने के संकल्प को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में यह महोत्सव जमीन पर उतार रहा है। इस बार स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत की सोच के तहत स्थानीय कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। ऑनलाइन टिकटिंग, डिजिटल स्टॉल आवंटन और तकनीक आधारित व्यवस्थाओं ने मेले को पहले से अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाया है।
थीम स्टेट और पार्टनर नेशन का खास आकर्षण
उत्तर प्रदेश और मेघालय थीम स्टेट के रूप में विशेष आकर्षण बने हुए हैं। वहीं, पार्टनर नेशन इजिप्ट का पैवेलियन लोगों के बीच खास चर्चा में है। यहां की पारंपरिक वास्तुकला शैली, हस्तनिर्मित कलाकृतियां और सजावटी वस्तुएं पर्यटकों को खूब भा रही हैं। कई दर्शकों ने इसे मेले का सबसे अलग अनुभव बताया।
संस्कृति, संगीत और शिल्प का अनूठा संगम
मेले में 50 से अधिक देशों के कलाकार मुख्य चौपाल पर भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दे रहे हैं, जबकि मिनी चौपाल पर क्षेत्रीय लोकनृत्य और लोकसंगीत की धूम है। महा स्टेज पर नामी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने मेले की रौनक और बढ़ा दी है। मिट्टी, लकड़ी, धातु, हथकरघा और कपड़े से बने उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे कारीगरों का कारोबार भी तेजी पकड़ रहा है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा बल
बढ़ती भीड़ से आसपास के होटल, रेस्तरां, ऑटो-टैक्सी चालक और छोटे दुकानदार भी लाभान्वित हो रहे हैं। पार्किंग, खान-पान और स्थानीय परिवहन से मिलने वाला राजस्व भी बढ़ा है जिससे पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधि तेज हुई है।
15 फरवरी तक चलेगा मेला, वैलेंटाइन वीक पर खास तैयारी
मेला 15 फरवरी तक चलेगा। वैलेंटाइन सप्ताह के दौरान युवाओं और कपल्स की संख्या बढ़ने की उम्मीद है जिसके लिए मेला प्रबंधन ने अतिरिक्त इंतजाम किए हैं। विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, हरियाणा पर्यटन निगम के एमडी पार्थ गुप्ता तथा सूचना, कला एवं संस्कृति विभाग की टीमें लगातार व्यवस्थाओं पर नजर रखे हुए हैं।
उम्मीद से कहीं ज्यादा खरीदार उमड़े हैं। लोगों ने परिवार सहित पहुंचकर विभिन्न सामानों की खरीदारी की। उससे उनको काफी फायदा मिला है।
- डेविड ठाकुर, शिल्पकार
शनिवार को हुए हादसे के बाद उनको उम्मीद नहीं थी कि इतनी ज्यादा भीड़ देखने को मिलेगी। स्टालों पर कला के कद्रदानों की भीड़ लगी रही। उनकी दुकान पर रविवार को अच्छी ब्रिकी हुई।
- हसीब, शिल्पकार
रविवार को महिलाओं ने बनारसी साड़ी,कश्मीरी शाल, घर का सजावटी सामान और सजने-संवरने की वस्तुओं की जमकर खरीदारी की।
- संतोष, शिल्पकार
दो हादसे के बाद शिल्पकारों को लगा था कि अब उनके सामान को खरीदने के लिए लोग नहीं आएंगे। लेकिन रविवार को सुबह 10 बजे दुकान को खोलते ही लोगों की भीड़ देखकर उनके चेहरे पर खुशी देखने को मिली।
- सौरभ, शिल्पकार
हादसे के बाद डर तो लग रहा था लेकिन अंतरराष्ट्रीय मेले को देखने का अलग ही मजा है। इसलिए वह अपने परिवार के साथ रविवार को मेला देखने के लिए आए। - हेमंत
हादसे के बारे में उनको सोशल मीडिया के जरिए जानकारी मिली थी। लेकिन रविवार को कॉलेज की छुट्टी होने की वजह से वह अपने दोस्तों के साथ मेला देखने के लिए आए। - वंश
वह दोस्तों के साथ झूला झूलने के लिए आए थे, लेकिन हादसे के बाद झूला परिसर को बंद कर दिया गया। जिस वजह से वह मेला देखकर वापस जा रहे है। - आकाश
हादसे के बाद उनको डर तो लग रहा था लेकिन वह दोपहर के बाद मेला परिसर में दोस्तों के साथ पहुंचे और मेले का आनंद लिया। - आशीष