चार महीने में आउटफॉल टैपिंग का लक्ष्य, प्रतापगढ़, मिर्जापुर और सैदपुर में बनाए जा रहे हैं प्लांट
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत गौंछी ड्रेन में सीधे गिर रहे गंदे पानी को रोकने के लिए नगर निगम ने करोड़ों रुपये की परियोजना तैयार की है। इस योजना के तहत जो सीवेज अब तक बिना उपचार के यमुना में पहुंच रहा था उसे बीच में ही रोककर शोधन संयंत्रों तक पहुंचाया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ 225 एमएलडी क्षमता के ट्रीटमेंट प्लांट शहर के अलग-अलग हिस्सों में बनाए जा रहे हैं। ऐसे में अब ड्रेन टैपिंग और बड़े प्लांट मिलकर एक संयुक्त व्यवस्था तैयार करेंगे जिससे यमुना के पानी को साफ करने में मदद मिलेगी।
शहर में लंबे समय से सीवरेज और ड्रेनेज की समस्या बनी हुई है। करीब 450 एमएलडी सीवेज रोजाना निकलता है लेकिन इसे पूरी तरह साफ करने की क्षमता अब तक नहीं थी। नतीजा यह रहा कि कई नालों और ड्रेनों के जरिये गंदा पानी सीधे यमुना में जाता रहा है। गौंछी ड्रेन भी ऐसे ही प्रमुख स्रोतों में शामिल रहा है। नई योजना के तहत गौंछी ड्रेन के आसपास मौजूद सभी सीवेज आउटफॉल पॉइंट्स को चिन्हित कर उन्हें टैप किया जाएगा। इसके बाद इस पानी को पाइपलाइन के जरिये नजदीकी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। इसको चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि मानसून से पहले ही इसका असर दिख सके। खोदाई के दौरान किसी तरह की दिक्कत न आए इसके लिए कॉल बिफोर यू डिग प्रणाली लागू की गई है। इस पूरी योजना का असर सीधे लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। जिन इलाकों में आज नालों की बदबू और गंदगी है, वहां राहत मिलेगी। मच्छरों और गंदे पानी से फैलने वाली बीमारियों में कमी आएगी। साथ ही शहर के पार्क और ग्रीन बेल्ट ज्यादा बेहतर हालत में नजर आएंगे।
बड़े प्लांट से जुड़ेगा पूरा सिस्टम
गौंछी ड्रेन से रोका गया पानी की व्यवस्था करने के लिए शहर में 225.5 एमएलडी क्षमता के टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट प्रतापगढ़, मिर्जापुर और बदरपुर सैद में बनाए जा रहे हैं। इन प्लांट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आने वाले 15 साल तक बढ़ती जरूरतों को भी पूरा किया जा सके। प्रतापगढ़ में 170 एमएलडी, मिर्जापुर में 160 एमएलडी और बदरपुर सैद में 125 एमएलडी तक क्षमता पहुंचाई जाएगी। इससे शहर में सीवेज को पूरी तरह ट्रीट करने की क्षमता मजबूत होगी और बिना उपचारित पानी के बाहर जाने की गुंजाइश कम होगी। इसके साथ ही नई व्यवस्था में ट्रीट किया गया पानी बेकार नहीं जाएगा। इसका उपयोग पार्कों की सिंचाई, निर्माण कार्यों और उद्योगों में किया जाएगा। इससे पीने के पानी की बचत होगी और भूजल पर दबाव कम पड़ेगा।
यमुना के लिए राहत की उम्मीद
अब तक फरीदाबाद का सीवेज यमुना के प्रदूषण का बड़ा कारण रहा है। गौंछी ड्रेन की टैपिंग और ट्रीटमेंट प्लांट शुरू होने के बाद नदी में जाने वाला पानी साफ होगा। इससे धीरे-धीरे यमुना की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
यमुना की सफाई को लेकर निगम गंभीरता से काम कर रहा है। पानी को साफ करके दोबारा हरियाली व उद्योग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त