- 22 सितंबर को एक्सप्रेस वे पर सफर कर खुद दे रहे हादसों को न्योता शीर्षक से की गई थी खबर प्रकाशित
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे का कार्य तेजी से चल रहा है। अभी निर्माण कार्य पूरा भी नहीं हुआ था कि लोगों ने एक्सप्रेस वे पर बने फ्लाईओवर के ऊपर से गुजरना शुरू कर दिया। इसी वजह से कुछ लोग सड़क हादसों के शिकार हो चुके हैं। उन्हीं हादसों को रोकने के लिए एक्सप्रेस वे पर बने प्रवेश और निकास पर बड़े-बड़े पत्थरों को लगाकर रास्ते को बंद कर दिया है। अब कोई भी वाहन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर बने फ्लाईओवर के ऊपर नहीं जा रहा है। अगर कोई वाहन सीकरी के पास से एक्सप्रेस वे के ऊपर चढ़ भी जाता है तो उसको उतरने का रास्ता नहीं मिलने की वजह से वह मीठापुर के पास जाकर उतर रहा है।
22 सितंबर को अमर उजाला के तहत एक्सप्रेस वे पर सफर कर खुद दे रहे हादसों को न्योता शीर्षक से खबर को प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि 30 किलोमीटर लंबे बाईपास रोड को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के लिंक रोड के रूप में विकसित किया जा रहा है। अभी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से सीकरी ले कर गांव मीठापुर तक फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा कर दिया है, लेकिन फ्लाईओवर के ऊपर रिफ्लेक्टर, साउंड बैरियर, स्ट्रीट लाइट आदि का कार्य चल रहा है। उन कार्य को पूरा करने के लिए सामान को लाने ले जाने के लिए वाहनों को जाम की समस्या से जूझना न पड़े। इसके लिए सीकरी से लेकर मीठापुर तक बने सभी फ्लाईओवर को खोल दिया है, लेकिन यह सभी फ्लाईओवर आम लोगों के लिए नहीं खोले गए हैं। उसके बावजूद भी आम लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। खबर का प्रकाशन होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से फ्लाईओवर के सभी प्रवेश और निकास पॉइंट पर बड़े-बड़े पत्थरों को लगाकर रास्ते को बंद कर दिया है। अब कोई भी आम लोग फ्लाईओवर के ऊपर से सफर नहीं कर पा रहे हैं।
बैरिकेड पर लिखा, रास्ता बंद है
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से जो बड़े-बड़े पत्थरों के बैरिकेड्स लगाए हैं, उसके ऊपर लोगों को चेतावनी के रूप में बताया जा रहा है कि रास्ता बंद है। साथ रात के समय कोई वाहन बैरिकेड से न टकरा जाए उसके चलते कुछ के ऊपर रिफ्लेक्टर टेप का भी इस्तेमाल किया हुआ है।
वर्जनहादसों को रोकने के लिए सभी प्रवेश और निकास पॉइंट पर पत्थरों को लगा दिया है। ताकि कोई भी आम आदमी फ्लाईओवर के ऊपर सफर न करे। क्योंकि अभी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसीलिए कोई हादसे का शिकार न हो उसके लिए यह इंतेजाम किए गए है।
- धीरज, प्रोजेक्ट हेड, एनएचएआई