- हार्मोनल बदलाव और पोषण की कमी बन रही बड़ी वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल में हड्डी रोग से जुड़े मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। खास बात यह है कि इन मरीजों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत अधिक है, जो बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही की ओर संकेत करती है।
अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में प्रतिदिन लगभग 220 से 250 मरीज हड्डियों से संबंधित समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं, जिनमें करीब 150 से 160 महिलाएं शामिल होती हैं। चिकित्सकों के अनुसार, महिलाओं में यह समस्या विशेष रूप से रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद बढ़ जाती है, जब शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी होने लगती है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि शंकर गौड़ ने बताया कि महिलाओं में हड्डियों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण हड्डियों का क्षय तेज हो जाता है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो हड्डियां भुरभुरी हो जाती हैं और मामूली चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि कैल्शियम और धूप की कमी इस समस्या के प्रमुख कारणों में शामिल है। अस्पताल आने वाली करीब 15 प्रतिशत महिलाएं चोट लगने के कारण उपचार के लिए पहुंचती हैं।
अस्पताल में नगला एन्क्लेव पार्ट-दो से इलाज के लिए आई बबीता रानी (55) ने बताया कि उन्हें कई महीनों से घुटनों में दर्द और चलने में दिक्कत हो रही थी। जांच में हड्डियों की कमजोरी पाई गई। वहीं एसी नगर निवासी रेखा देवी (48) ने बताया कि उन्हें लंबे समय से कमर दर्द की शिकायत थी, जो हाल के दिनों में बढ़ गई है।
डबुआ कॉलोनी निवासी रीना देवी (45) ने बताया कि मोटरसाइकिल से गिरने के कारण उनकी कलाई में चोट लग गई, जिसके बाद डॉक्टर ने एक्स-रे जांच की सलाह दी। इसी तरह मुजेसर निवासी मालती देवी (58) ने बताया कि जोड़ों में जकड़न और दर्द के कारण उनके लिए दैनिक कार्य करना भी मुश्किल हो गया है।
डॉ. गौड़ ने बताया कि महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस, ऑस्टियोपेनिया और जोड़ों की घिसावट (ऑस्टियोआर्थराइटिस) जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके पीछे मुख्य कारण कैल्शियम और विटामिन की कमी, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान है।
डॉ. रवि शंकर गौड़ ने बताया कि बीमारियों से बचाव के लिए संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और समय-समय पर हड्डियों की जांच करवाना बेहद जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से 30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को नियमित जांच कराने और धूप में समय बिताने की सलाह दी, ताकि शरीर को आवश्यक पोषण मिल सके।
पिछले कई महीनों से घुटनों में दर्द और चलने में परेशानी हो रही थी। जांच में हड्डियों की कमजोरी सामने आई।-बबीता रानी
कमर दर्द की शिकायत लंबे समय से थी, लेकिन अब दर्द बढ़ने पर अस्पताल आना पड़ा।-रेखा देवी
हल्की चोट लगने पर मेरी कलाई की हड्डी में दरार आ गई, जिससे काफी दिक्कत हुई।-रीना देवी
जोड़ों में जकड़न और दर्द के कारण रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो गया है।-मालती देवी
हड्डियों की बीमारियों से बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त धूप और समय-समय पर जांच जरूरी है। 30 वर्ष के बाद महिलाओं को विशेष रूप से हड्डियों की देखभाल पर ध्यान देना चाहिए।-डॉ. रवि शंकर गौड़