-,मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की जांच कराने का दिया आश्वासन
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। प्रदेश के किसानों को पिछले कई वर्षों से लंबित फसल खराबी मुआवजे के मामले ने बजट सत्र के दौरान विधानसभा में जोर पकड़ लिया है। नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल से सवाल करते हुए वर्ष 2022 से 2026 तक फसल खराबे पर वितरित की गई राशि, लंबित मुआवजे और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का विवरण मांगा।
विधायक ने आरोप लगाया कि बार-बार मामला उठाने के बावजूद 2022 का मुआवजा भी पूरी तरह वितरित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कई बार राशि जिलों को भेजी जाती है, लेकिन बिना वितरण के वापस लौट जाती है, जो प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। सदन में इस मुद्दे पर विधायक और मंत्री के बीच तीखी बहस भी हुई।चर्चा के दौरान विधायक ने बताया कि 6395 गांवों के 5.29 लाख किसानों ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन किया, जिनकी लगभग 31 लाख एकड़ फसल खराब हुई। इनमें मेवात के 440 गांव, यमुनानगर के 527 और अंबाला के 444 गांव शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पांच लाख आवेदकों में से केवल लगभग 10 प्रतिशत, यानी 50 हजार किसानों को ही वर्ष 2025 की फसल खराबी के लिए 117 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
मामले में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आश्वासन दिया कि लंबित मामलों की जांच कर दोबारा सत्यापन कराया जाएगा और पात्र किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। सरकार की ओर से कहा गया कि जिन किसानों के खातों में तकनीकी कारणों से राशि नहीं पहुंची, उनकी जांच कर पुनः भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। विधायक आफताब अहमद ने कहा कि उनका प्रयास है कि किसानों को जल्द से जल्द उनका हक मिले, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत मिल सके।