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Faridabad News: ऐतिहासिक सिही तालाब का होगा कायाकल्प, लोगों को मिलेगा सुरक्षित सार्वजनिक स्थल

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चारों ओर छह फीट ऊंची बाउंड्री वॉल और मुख्य प्रवेश द्वार बनाने की योजना को मिली मंजूरी
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ओल्ड फरीदाबाद के वार्ड-39 में स्थित सिही तालाब का वर्षों से लंबित सौंदर्यीकरण अब धरातल पर उतरने जा रहा है। नगर निगम ने तालाब के चारों ओर छह फीट ऊंची प्रीकास्ट बाउंड्री वॉल और मुख्य प्रवेश द्वार बनाने की योजना को मंजूरी दे दी है। लंबे समय से सुरक्षा घेरा न होने के कारण उपेक्षा और गंदगी का शिकार हो रहे इस ऐतिहासिक जलस्रोत को अब संरक्षित और व्यवस्थित रूप देने की तैयारी है।

सिही गांव जो आज ओल्ड फरीदाबाद का हिस्सा है अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के लिए जाना जाता है। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार यह क्षेत्र मध्यकालीन बस्तियों में शामिल रहा है और यहां के तालाब पारंपरिक जल संरक्षण प्रणाली का अहम हिस्सा रहे हैं। पुराने समय में वर्षा जल संचयन और सिंचाई के लिए इन तालाबों का उपयोग किया जाता था। सिही तालाब भी कभी ग्रामीण जीवन की धुरी माना जाता था जहां पशुओं को पानी पिलाने से लेकर सामाजिक आयोजन तक होते थे।
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शहरी विस्तार और आबादी बढ़ने के साथ तालाब की उपयोगिता घटती गई। चारों ओर अवैध अतिक्रमण, खुले में कूड़ा फेंकने और सुरक्षा प्रबंध न होने से इसकी स्थिति बिगड़ती चली गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए।

सुरक्षा और स्वच्छता की दिशा में कदम

नगर निगम के इस प्रोजेक्ट के तहत तालाब के चारों ओर मजबूत प्रीकास्ट बाउंड्री वॉल बनाई जाएगी। दीवार के साथ लोहे का गेट लगाया जाएगा जिससे अनधिकृत प्रवेश रोका जा सकेगा। अभी तक खुला क्षेत्र होने के कारण यहां कूड़ा फेंकने और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें मिलती रही हैं। क्षेत्रीय निवासियों के अनुसार बरसात के मौसम में तालाब में पानी भर जाता है लेकिन खुलेपन के कारण उसमें प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट भी जमा हो जाते हैं। इससे जल प्रदूषण बढ़ता है और मच्छरों की संख्या में इजाफा होता है। बाउंड्री बनने से कूड़ा फेंकने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और जल स्रोत को संरक्षित किया जा सकेगा।
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प्रीकास्ट तकनीक का होगा इस्तेमाल
निर्माण कार्य में प्रीकास्ट तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक में दीवार के हिस्से पहले से तैयार किए जाते हैं और मौके पर जोड़कर स्थापित किए जाते हैं। इससे समय की बचत होती है और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। पारंपरिक ईंट-पत्थर की तुलना में यह तरीका अधिक टिकाऊ और कम समय में पूरा होने वाला माना जाता है।
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