62 करोड़ रुपये होंगे खर्च,18 महीने में तैयार होंगे स्मार्ट और डस्ट-फ्री कॉरिडोर
- सबसे अधिक ट्रैफिक दवाब वाली सड़कों के चयन के बाद रोडमैप पर काम शुरू
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। शहर की टूटी-फूटी सड़कों, धूल और जलभराव की समस्या से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने सात प्रमुख सड़कों के पुनरुद्धार की योजना को मंजूरी दी है। इस पर 62 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस रोड नेटवर्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने के साथ यातायात व्यवस्था सुधारने, प्रदूषण नियंत्रण और शहरी सौंदर्यीकरण पर भी खास जोर दिया जा रहा है।
इसमें फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट और जलभराव से निपटने के लिए वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम को शामिल किया गया है ताकि लोगों को रोजमर्रा की दिक्कतों से स्थायी राहत मिल सके। एफएमडीए ने इसमें उन सड़कों को प्राथमिकता दी है जहां ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक है और जिनकी हालत लंबे समय से खराब बनी हुई है। लक्कड़पुर फाटक से शिव मंदिर रोड, नीलम बाटा रोड से एनआईटी-5 और प्याली चौक से हार्डवेयर चौक जैसे प्रमुख मार्ग इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं। ये सड़कें औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्रों को जोड़ने वाली मुख्य धुरी हैं जिन पर हर दिन भारी संख्या में वाहन गुजरते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन सड़कों के सुधरने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। जाम की समस्या कम होगी और लोगों का समय भी बचेगा।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा करीब 50 करोड़ रुपये सिविल कार्यों पर खर्च होगा जिसमें सड़कों की मजबूती, फुटपाथ निर्माण, साइकिल ट्रैक और ड्रेनेज सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा 10 करोड़ रुपये स्मार्ट स्ट्रीट लाइट और बिजली नेटवर्क को मजबूत करने पर खर्च होंगे। वहीं 2 करोड़ रुपये सड़क किनारे हरित पट्टी विकसित करने और धूल नियंत्रण जैसे सौंदर्यीकरण कार्यों पर लगाए जाएंगे।
हाई-टेक सुविधाएं, बार-बार खोदाई से मिलेगी राहत
इस बार योजना में मल्टी-यूटिलिटी डक्ट की व्यवस्था भी की जा रही है जिससे बिजली और अन्य केबल सड़क के किनारे निर्धारित डक्ट में डाले जा सकेंगे। इससे भविष्य में सड़कों को बार-बार खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए अलग से सुरक्षित लेन बनाई जाएगी। बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए सड़कों के ढाल और नालियों को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा सड़क किनारे हरित पट्टी विकसित कर धूल को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा जिससे शहर के वायु गुणवत्ता स्तर में सुधार की उम्मीद है।
18 महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य
एफएमडीए की बैठक में सीएम नायब सिंह सैनी की तरफ से कई अधिकारियों को फटकार लगाई गई थी। वहीं दो अधिकारियों पर एक्शन भी हुआ है। इसके बाद एफएमडीए ने प्रजोक्ट को समय पर पूरा करने के लिए गंभीरता से काम शुरू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा और 18 महीने के भीतर इसे पूरा करने की योजना है। इसके लिए चालू वित्त वर्ष में 11 करोड़ रुपये और अगले वित्त वर्ष में 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इन इलाकों को मिलेगी राहत
नीलम बाटा रोड पर लंबे समय से जाम और जलभराव की समस्या बनी हुई है, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। इस परियोजना के बाद यहां यातायात सुगम होने की उम्मीद है। वहीं एनआईटी और लक्कड़पुर क्षेत्र के निवासियों को भी बेहतर सड़कें मिलने से आवागमन में राहत मिलेगी। प्याली चौक से हार्डवेयर चौक तक का इलाका औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र है, जहां भारी वाहनों का दबाव रहता है। यहां डस्ट-फ्री सड़कें बनने से प्रदूषण कम होगा और कामकाज में भी आसानी आएगी।
डस्ट-फ्री कॉरिडोर बनेगा
इस योजना को पर्यावरणीय मानकों से जोड़ते हुए तैयार किया गया है। सीएक्यूएम के निर्देशों के तहत सड़कों को डस्ट-फ्री कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। हरित पट्टियों और बेहतर निर्माण तकनीकों के जरिये उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। बेहतर सड़कें जहां समय और ईंधन की बचत करेंगी वहीं दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी। जलभराव खत्म होने से बरसात के मौसम में राहत मिलेगी और शहर की समग्र छवि भी बेहतर होगी।
इस परियोजना को लेकर प्राधिकरण गंभीरता से काम कर रहा है। इस कार्यों को जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। - विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर, एफएमडीए