पंचायती जमीन पर कब्जे की कोशिश का लगा है आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
तावड़ू। उपमंडल के अंतर्गत ग्राम पंचायत बिस्सर अकबरपुर की पंचायती जमीन और सुरजीवन रिजॉर्ट भूमि को लेकर चल रहे विवाद में नूंह की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने पक्षकार कंपनी की मांग को खारिज कर दिया। जिसमें मुख्य रूप से केस में याचिकाकर्ता की शिकायत को अस्वीकार करने की मांग की गई थी। यह मामला कंपनी द्वारा वसीयत के आधार पर सौ करोड़ रुपये की जमीन को मात्र लगभग 18 करोड़ रुपये में खरीदने और जबरन कब्जा करने की कोशिश से जुड़ा है। जिसकी जांच एसआईटी भी कर रही है। इसी मामले में पंचायती जमीन की विरासत बदलने की कोशिश को वर्तमान काश्तकार देवेंद्र कमल श्रीवास्तव ने कोर्ट में चुनौती दी थी। अब कोर्ट के नए आदेश से कंपनी प्रतिनिधियों को करारा झटका लगा है।
पीड़ित देवेंद्र कमल श्रीवास्तव ने बताया कि वलंतिर डायनेमिक एलएलपी और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा के लिए कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। जिसमें विरोधी पक्ष पर जमीन का जबरन और गलत तरीके से हस्तांतरण करने की कोशिश का आरोप लगाया गया। हालांकि प्रतिवादी की ओर से दायर याचिका याचिका में मुकदमे को आधारहीन बताते हुए खारिज करने की मांग की गई। जिसमें आरोप लगाया कि देवेंद्र ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है। इसके अलावा कोर्ट को बताया गया कि मुकदमा ब्लैकमेल और उत्पीड़न के उद्देश्य से दायर किया गया था। लेकिन पीड़ित देवेंद्र ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कोई समझौता नहीं हुआ और यदि कोई दस्तावेज है तो वह जाली और फर्जी है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि बेटे-बेटी उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं और एक भू माफिया की कंपनी के साथ मिलकर जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। यह बच्चे पहले से ही संपत्ति विवाद को लेकर रंजिश रखते हैं और उनके बीच पहले से ही मुकदमे चल रहे हैं। मुकदमे को कानूनी रूप से वैध बताते हुए पीड़ित ने कहा कि विरोधी पक्ष अवैध रूप से कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं, इसलिए स्थायी निषेधाज्ञा की मांग उचित है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के तहत शिकायत अस्वीकार करने के लिए विशिष्ट आधार होने चाहिए। यहां कोई ऐसा आधार नहीं मिला जिसके कारण कार्रवाई न हो। इसलिए कंपनी की मांग खारिज की जाती है। मामले को अब 27 अक्तूबर तक के लिए के लिए स्थगित कर दिया गया है।