नगर निगम ठेकेदार सतबीर सिंह की ओर से दायर की गई थी अग्रिम जमानत याचिका
जिला अदालत ने दोनों मामलों में सोमवार को याचिका खारिज कर दी
एंटी करप्शन ब्यूरो ने 12 अगस्त 2025 को दर्ज की थी दो एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। फर्जी वर्क ऑर्डर के आधार पर गबन व भ्रष्टाचार के दो मामलों में नगर निगम ठेकेदार सतबीर सिंह को राहत नहीं मिली। ठेकेदार के अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दलील दी कि ये सरकारी ठेकेदार है। विजिलेंस विभाग ने परेशान करने के लिए कई एफआईआर दर्ज कर दी हैं। साल 2022 और 2023 में दर्ज 4 एफआईआर के ही आरोपों के आधार पर नई एफआईआर दर्ज कर दी गई हैं। नवंबर 2018 में किए गए कार्य को लेकर अब 6 साल बाद एफआईआर दर्ज की गई है।
वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि इस पर गंभीर आरोप हैं कि सरकारी ठेकेदार होते हुए नगर निगम अधिकारियों के साथ मिलकर गबन किया है। एक मामले में 12.18 करोड़ रुपये और दूसरे में 7.63 करोड़ रुपये से अधिक का गबन फर्जी वर्क ऑर्डर के आधार पर किया गया। सभी पक्षों को सुनकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने दोनों मामलों में ठेकेदार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
एसीबी थाना में 12 अगस्त 2025 को एफआईआर नंबर 22 एसीबी के इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह के बयान पर दर्ज की गई। इसमें आरोप लगा कि 24 मार्च 2022 को दर्ज साजिश के तहत ठगी व भ्रष्टाचार की धाराओं वाली एफआईआर नंबर 11 की जांच में सामने आया कि बल्लभगढ़ के मोहना रोड पर आरएमसी रोड बनाने व इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने के फर्जी वर्क ऑर्डर ठेकेदार सतबीर को 27 नवंबर 2018 को जारी किए गए। ये कार्य 8 अलग हिस्सों में बांटा गया और 8 फर्जी वर्क ऑर्डर जारी हुए। महज 20 दिन बाद ही मूल एस्टीमेट को बढ़ाया गया। साथ ही ठेकेदार को पेमेंट जारी कर दी गई। जांच में पता चला कि बल्लभगढ़ के संबंधित जोन के रजिस्टर में इन वर्क ऑर्डर का जिक्र ही नहीं था।
एसीबी थाना में 12 अगस्त 2015 को एफआईआर नंबर 23 एसीबी के डीएसपी अर्जुन राठी के बयान पर दर्ज की गई। इसमें आरोप लगा कि 24 मार्च 2022 को दर्ज साजिश के तहत ठगी व भ्रष्टाचार की धाराओं वाली एफआईआर नंबर 11 की जांच में सामने आया कि तिगांव रोड पर आरएमसी रोड व इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने के फर्जी वर्क ऑर्डर ठेकेदार सतबीर को 27 नवंबर 2018 को जारी किए गए। ये कार्य 13 अलग हिस्सों में बांटा गया और 13 फर्जी वर्क ऑर्डर जारी किए गए। साथ ही महज 20 दिन बाद ही मूल एस्टीमेट को बढ़ाया गया।