बल्लभगढ़ सदर थाना में 16 अक्तूबर 2022 को दर्ज हुई थी फर्जीवाड़े को लेकर एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। बगैर कोई काम किए ग्राम पंचायत मुजेड़ी के खाते से 43.61 लाख रुपये की पेमेंट लेने वाले ठेकेदार को अंतरिम जमानत नहीं मिली। ठेकेदार हीरालाल के अधिवक्ता की ओर से याचिका दायर कर दलील दी गई कि इसे केस में गलत फंसाया गया है और 10 सितंबर 2025 से ये हिरासत में है।
हीरालाल के पिता का देहांत 30 दिसंबर 2025 को हो गया और यूपी रायबरेली में गांव में 14 जनवरी को रीति-रिवाज होना है। अभियोजन पक्ष की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं। जांच अभी लंबित है और सह-आरोपियों की गिरफ्तारी बकाया है। सभी पक्षों को सुनकर मंगलवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। पूरे फर्जीवाड़े को लेकर 16 अक्तूबर 2022 को बल्लभगढ़ सदर थाना में एफआईआर दर्ज हुई है। इसमें साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर ठगी और भ्रष्टाचार विरोधी अधिनियम की धाराएं लगाई गई। शिकायतकर्ता सतबीर कपासिया ने मामले में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले में आरोप लगाया गया कि पंचायत के तत्कालीन सरपंच, ग्राम सचिव और बीडीपीओ ने आपसी मिलीभगत से बिना प्रशासनिक स्वीकृति के करीब 22 करोड़ रुपये विभिन्न कंपनियों को जारी कर दिए। इनमें से लगभग 17.14 करोड़ रुपये अलग-अलग फर्मों को एक ही दिन में भुगतान किए गए। आरोप है कि इनमें से कई कंपनियां अधिकारियों के रिश्तेदारों और परिचितों से जुड़ी थी। आरोप है कि पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायत रिकॉर्ड जमा नहीं कराया गया। बाद में रिकॉर्ड गुम होने की शिकायत दर्ज कराई गई, जिससे घोटाले को छिपाने की कोशिश की गई।
इस मामले में अदालत ने रसिक बिहारी इंफ्राटेक एंड कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर तनुजा शर्मा की जमानत याचिका भी 9 जनवरी को खारिज की थी। मामले में आरोप है कि ग्राम पंचायत मुझेड़ी के खाते से बिना किसी विकास कार्य या सामग्री आपूर्ति के करीब 1.54 करोड़ रुपये कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए।