ऑटो और दोपहिया वाहनों की भीड़ से स्मार्ट सिटी में बढ़ रहा है प्रदूषण का स्तर
38 प्रतिशत हिस्सेदारी है दोपहिया-तिपहिया वाहनों की प्रदूषण बढ़ाने में
राहुल राज
फरीदाबाद। करीब 19 लाख की आबादी वाले औद्योगिक शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बदहाल है। शहर में 1200 सिटी बसों की जरूरत है, लेकिन सड़कों पर मौजूदा समय में एक भी सिटी बस नहीं चल रही है। इस वजह से सड़कों पर ऑटो और दोपहिया वाहनों की भीड़ बढ़ रही है। इससे स्मार्ट सिटी में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है। प्रदूषण का स्तर बढ़ाने में दोपहिया-तिपहिया वाहनों की 38 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
सीएक्यूएम (केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग) की वार्षिक कार्ययोजना में शहर के लिए करीब 1200 सिटी बसों की जरूरत बताई है। वहीं, इसके उलट सड़कों पर एक भी सिटी बस नहीं चल रही है। सार्वजनिक परिवहन की कमी से न केवल लोगों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है, बल्कि निजी वाहनों की बढ़ती संख्या जाम और प्रदूषण को भी बढ़ावा दे रही है। शहर में सार्वजनिक परिवहन की कमी और निजी वाहनों पर बढ़ती निर्भरता से वायु प्रदूषण की चुनौती गंभीर हो रही है। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम-10 के कुल उत्सर्जन में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत और तिपहिया वाहनों की 12 प्रतिशत है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 38 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, परिवहन क्षेत्र की पीएम-2.5 में वार्षिक औसत हिस्सेदारी 20 प्रतिशत और पीएम-10 में 11 प्रतिशत है।
वाहनों से रोजाना 17 टन प्रदूषक निकल रहा
जिले में वाहनों के टेलपाइप से प्रतिदिन 8,767 किलोग्राम पीएम-10 और 8,493 किलोग्राम पीएम-2.5 निकल रहा है। वहीं, सड़कों की धूल से रोजाना 78,630 किलोग्राम पीएम-10 और 18,904 किलोग्राम पीएम-2.5 पैदा होता है। कुल मिलाकर वाहनों से रोजाना 17 टन प्रदूषक निकल रहा है। रिपोर्ट में पीएम-10 उत्सर्जन में सड़क की धूल की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत है। ऐसे में निजी वाहनों का बढ़ता दबाव, जाम और सड़कों पर उड़ती धूल शहर की हवा को प्रदूषित करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।
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त्योहार के सीजन में सफर नहीं आसान
मेट्रो और रेल से दिल्ली व आसपास के शहरों तक पहुंचना आसान है, लेकिन त्योहार के सीजन में बसों की कमी के कारण स्टेशन से घर या कार्यस्थल तक का सफर चुनौती बना हुआ है। कॉलोनियों, आवासीय सेक्टरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक नियमित बस सेवा नहीं होने से यात्रियों को ऑटो-ई-रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है। जिससे लोगों का खर्च भी बढ़ता है। बुजुर्गों, महिलाओं और विद्यार्थियों को भी परेशानी होती है। कई लोग कार्यालय जाने या शहर के दूसरे स्थानों तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। इसके कारण शहर में वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। इसके कारण शहर में जगह-जगह जाम की स्थिति बन जाती है।
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दिसंबर तक 100 ई-बसें उतारने की तैयारी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की वार्षिक कार्ययोजना में दिसंबर 2026 तक 200 इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने और चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का लक्ष्य रखा है। वहीं, फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) सिर्फ 100 बसें चलाने की तैयारी कर रहा है।
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वाहन का प्रकार पीएम-10 उत्सर्जन पीएम-10 में हिस्सेदारी पीएम-2.5 उत्सर्जन
ट्रक 3,188 36% 3,049
दुपहिया वाहन 2,246 26% 2,178
तीन-पहिया (ऑटो) 1,087 12% 1,089
कार 507 6% 508
बस 507 6% 508 (आंकड़ा केजी/दिन)
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वर्जन-
एफएमडीए दिसंबर से 100 बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। सेक्टर-62 में बन रहा बस डिपो भी लगभग तैयार हो चुका है। बस सेवा शुरू होने के बाद शहर के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।- धर्मवीर गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, एफएमडीए