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Faridabad News: धूल पर फेल प्रशासन ने ग्रेप-3 के नियम भी कागजों में सिमटे

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निरीक्षण में 127 में से सिर्फ 20 से कम सड़कें मिली थी साफ
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निर्माण बंदी के आदेशों की खुलेआम हो रही अनदेखी

मोहित शुक्ला

फरीदाबाद। शहर में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए लागू किए गए ग्रेप-3 के नियमों को जमीनी स्तर पर लागू कराने में प्रशासन नाकाम नजर आ रहा है। सड़कों पर उड़ती धूल को रोकने के दावे ध्वस्त होते दिख रहे हैं मंगलवार को जब 127 चिन्हित सड़कों में से 20 से कम सड़कें ही साफ मिली थी वहीं एनसीआर स्तर पर किरकिरी होने और मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार के सख्त निर्देशों के बावजूद भी हालात में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा।

ग्रेप-3 के तहत निर्माण कार्यों पर रोक और धूल नियंत्रण के लिए ग्रीन जाली, पानी का छिड़काव, ढककर सामग्री ढोने जैसे नियम अनिवार्य हैं, लेकिन शहर के कई हिस्सों में इनका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को पड़ताल के दौरान पाया कि निर्माण बंदी के आदेशों के बावजूद कई जगह काम जारी है।
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बीके चौक से नीलम चौक की ओर आने वाले मार्ग पर स्लिप रोड बनाने का काम चल रहा है। वहीं सेक्टर-12 में टाउन पार्क के सामने वाली सड़क पर भवन निर्माण खुलेआम जारी है। सेक्टर 9-10 की डिवाइडिंग रोड पर भी निर्माण गतिविधियां दिखाई दीं। इसके अलावा नेहरू ग्राउंड क्षेत्र में भी निजी भवन का निर्माण होता पाया गया। इन स्थानों पर न तो ग्रीन जाली लगी थी और न ही धूल नियंत्रण के अन्य उपाय नजर आए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण सामग्री खुले में पड़ी रहती है, ट्रक बिना ढके दौड़ते हैं और सड़कों पर पानी का छिड़काव न होने से दिनभर धूल उड़ती रहती है। निर्माण बंद होने के आदेश के बाद भी कहीं पर निर्माण कार्य नहीं रोका गया है। इससे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर असर पड़ रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर बार-बार चेतावनी और निर्देश जारी किए जा रहे हैं लेकिन निगरानी और कार्रवाई कमजोर दिख रही है। जानकारों के मुताबिक, ग्रेप-3 के दौरान सख्ती से नियम लागू न होने का सीधा असर वायु गुणवत्ता पर पड़ता है। शहर पहले ही प्रदूषण के उच्च स्तर से जूझ रहा है ऐसे में नियमों की अनदेखी हालात को और बिगाड़ रही है।

प्रदूषण को लेकर निरीक्षण रिपोर्ट में कमियां सामने आने के बाद निगम व अन्य जिम्मेदार विभागों को सुधार के निर्देश दिए गए हैं लेकिन मौके पर बदलाव नहीं दिख रहा। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निर्माण स्थलों पर नियमित जांच व मौके पर चालान और काम रुकवाने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं होगी तब तक ग्रेप के नियम सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेंगे।
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जिम्मेदारी से बचते अधिकारी नहीं उठाते कॉल


जमीनी स्तर पर सख्ती न दिखने के बाद जब प्रदूषण विभाग से मामले को लेकर हुई कार्रवाई व पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क का प्रयास किया गया तो आरओ फरीदाबाद संदीप सिंह व बल्लभगढ़ आरओ हरीश कुमार ने कॉल नहीं उठाया वहीं मैसेज करने पर भी कोई जवाब नहीं दिया। वहीं उपायुक्त आयुष सिन्हा ने ग्रेप तीन लगते ही प्रदूषण को नियंत्रित करने के आदेश जारी किए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारी काम करते नहीं दिख रहे हैं।
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